डिप्रेशन से बचने के उपाय

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डिप्रेशन से बचने के उपाय  


डिप्रेशन से बचने के उपाय डिप्रेशन के लक्षण डिप्रेशन का रामबाण इलाज डिप्रेशन योग डिप्रेशन की दवा का नाम डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज डिप्रेशन से बाहर कैसे निकले डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणअवसाद से बचने के उपाय डिप्रेशन से बाहर कैसे निकले डिप्रेशन के प्रकार उदासी दूर करने के उपाय डिप्रेशन से छुटकारा डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण डिप्रेशन के लक्षण और उपाय - अवसाद से निकलने के उपायडिप्रेशन एक छोटा सा प्रचलित शब्द है पर शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने इसे सुना ना हो ,इस शब्द से परिचित होने के कारण ही अक्सर लोग इसे छोटी-मोटी परेशानी  समझ कर नजरंदाज कर देते हैं ।आधुनिक भागदौड़ भरी जिन्दगी और प्रतिस्पर्धात्मक समाज में रहते हुए लगभग हर दूसरा व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है ।हर चौथा व्यक्ति जिन्दगी में कभी न कभी डिप्रेशन का शिकार हो चुका होता है। बड़ा ही शातिर शिकारी है ये जीवन के उतार-चढाव को पार करते हुए कोई व्यक्ति अगर जरा भी असंतुलित हुआ तो ये झट से उसे अपना शिकार बना लेता है। 

डिप्रेशन को पहचानना (Recognizing Depression) - 

अक्सर लोग डिप्रेशन को कमजोरी की निशानी मान कर उस पर बात करने से, ये स्वीकार करने से कि वो डिप्रेशन में हैं हिचकिचाते है और यही कारण है कि लोग धीरे-धीरे गहरे अवसाद में चले जाते हैं। कई बार लोगो
डिप्रेशन से बचने के उपाय
अवसाद 
को लगता है कि अगर चार लोगों को पता चला कि मैं डिप्रेशन में हूँ तो वो मेरे बारे में जाने क्या-क्या सोचेंगे,,यही सोचकर वो अपनी मनोस्तिथि को छुपाने की कोशिश में गहरे अवसाद में जकड़ते चले  जाते है। प्रत्येक व्यक्ति की क्षमताएँ अलग-अलग होती हैं कुछ विपरीत से विपरीत परिस्तिथि झेल जाते हैं तो कुछ परिस्तिथियाँ जरा सी प्रतिकूल होते ही अवसादग्रस्त हो जाते हैं।आधुनिकता की दौड़ में समृद्धि,प्रसिद्धि की चाह में व्यक्ति इस कदर अंधे है कि अपने किसी खास से या फिर स्वयं से भी कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगा लेते हैं और इच्छओं के पूरा न हो पाने पर सपने और जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाने के चक्कर में डगमगाने लगते हैं । हजार कारण होते हैं अवसाद में जाने के ,कभी स्वयं की अपेक्षाओं पर  खरा न उतरने के कारण तो कभी लम्बी बीमारी झेलने से भी , तो कभी छोटी-छोटी इच्छाओं के पूरी न होने से तो कभी किसी का जरा सा उपेक्षित व्यवहार इससे बड़े ही नही बल्कि बच्चे भी बड़ी मात्रा में अवसाद में जा रहे हैं।किसी बीमारी का इलाज तभी सम्भव है जब हमें इसके वास्तविक कारणों का पता हो । किसी के अवसाद में जाने की कोई बड़ी वजह हो जरुरी नही  कई बार  जीवन की छोटी-छोटी  घटनाएँ ,घरवालों का पक्षपात ,करीबी रिश्तों में उपेक्षा ,घरेलू हिंसा,सपने पूरे करने में अवरोध आना ,घरेलू दासता आदि छोटी-छोटी  घटनाओं से भी अवसाद पनप जाता है और धीरे-धीरे व्यक्ति पर पूरी तरह हावी हो जाता है। डिप्रेशन व्यक्ति को पूरी तरह बर्बाद कर देता है ये व्यक्ति की सृजन शक्ति,स्मरण शक्ति,जिजीविषा सब नष्ट कर देता है ।

डॉक्टर के पास जाना (Seeing a Doctor) - 

जब कभी आपको ये महसूस हो कि आप अवसाद में घिर रहे है या घिरने वाले हैं तो जल्द से जल्द खुद को बाहरी दुनिया से जोड़ लीजिये। अपने शौक के लिए समय  निकालिए और उसे जीना शुरु कीजिये । यकीन मानिये ये अवसाद से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है ।भले ही चार लोगों के डर से व्यक्ति ये स्वीकार करने में झिझकते हैं कि वो डिप्रेशन में हैं या कभी उन्होंने कभी डिप्रेशन को झेला है। मैंने डिप्रेशन को झेला है इसलिए जानती हूँ  कि डिप्रेसन की भयावहता क्या होती है । मैं अपने आराध्य में अटूट आस्था और लिखने की आदत के सहारे उस स्तिथि से बाहर निकलने में सफल रही । मैंने पाया है कि कई बार लोगो का अंतर्मुखी व्यक्तित्व भी उन्हें अवसाद में पहुंचा देता है ।इसलिए अपने सुख-दुःख अपनी उलझन को अपने मन में समेट कर मत रखिये किसी खास के साथ बाँटना सीखिए। जितना हो सके खुद को दुनिया से जोडिए ।।

खुशियाँ बाँटने से दुगुनी और दुःख आधे रह जाते हैं। वो लोग जो सारी बातें अपने मन में समेट कर  रखते है धीरे-धीरे उन्हें उदाशी घेरने लगती है और जल्द ही उनका एकाकीपन उनके चेहरे पर झलकने लगता है ।कोई कितना भी  चालाक क्यों ना हो अवसाद से पड़ने वाले शारीरिक मानसिक प्रभाव को नही छुपा पाता ।जब  कोई इस स्तिथि से गुजर रहा हो तो छुपाने के प्रयासों के बाद भी उसकी घुटन,उसकी मानसिक उथल-पुथल का असर उसके व्यवहार के साथ ही उसके शरीर व शब्दों में भी आसानी से  झलकने लगता है ।किसी अवसादग्रस्त व्यक्ति में आत्मघाती प्रवत्तियां इतनी तेजी से पनपती  हैं कि  उसे हर पल नीरस लगने लगता हैं ऐसे व्यक्ति को कभी जी भर  रोने का मन करता है जिससे मन में जमा सारे दुःख दर्द बह जाये तो कभी वह खुलकर हँसना चाहता है ।कभी वो अपना जीवन समाप्त करना चाहता है तो कभी बिलकुल अकेले हो जाना ।यह ऐसी भयावह अवस्था है कि या तो आपकी प्रबल जिजीविषा या कोई सच्चा दोस्त ही आपको बाहर निकाल सकता है वरना ये ऐसा दलदल है जिसमे व्यक्ति धँसता ही चला जाता है और एक दिन खुद को मिटा देता है । हजार कारण है अवसाद में जाने के मगर बचने का मात्र एक खुद को बाहरी दुनिया से जोडिए ।उन रुचियों को समय दीजिये जो आपको ख़ुशी देती  हैं । जब कभी आपको महसूस हो कि आपकी जिन्दगी नकारात्मकता से घिर गई है तो सतर्क हो जाइये ।इससे पहले कि आप अवसाद के चपेट में आयें  खुद को  रुचिकर और मनोरंजक कामों से जोड़ ले ।
अवसाद
नाचना,गाना,घूमना,अच्छी किताबे पढ़ना,पेंटिंग बनाना और लिखना जैसे कामों में मन को व्यस्त रखिये । अगर आपका कोई शौक नही,आपका कोई दोस्त कोई रिश्तेदार नही जिससे आप मन की बातें कह सके तो लिखना शुरु करिये। देखना जल्द ही कलम आपकी सच्ची साथी और आपकी डायरी आपकी सबसे बड़ी राजदार बन जाएगी ।लिखिए ताकि आपके मन में इकट्ठे सारे अभाव,सारी परेशानी बाहर निकल जाये। अपने सारे दर्द को शब्द के रुप में ढालिए। अनावश्यक रोक टोक के माहौल में पला-बढ़ा व्यक्ति अंतर्मुखी हो जाता है ।ऐसे व्यक्तियों को किसी का जरा सा अनापेक्षित व्यवह़ार लम्बे समय तक दुखी रखता है और कभी-कभी तो मामूली बातों पर ये आत्महत्या जैसे घातक कदम उठा  लेते हैं । लोगों में अवसाद' इस कदर पांव पसार रहा है कि आत्महत्या के आकडे साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं । आधुनिकता ने  रिश्तों को मुठ्ठियों में कैद कर दिया है। अब रिश्ते खोखले हो चुके हैं उनमें वो पहला वाला प्यार और अपनापन नही रहा । लोगो में ,बच्चों में एक अनजाना डर फ़ैल रहा है कि वो अपनी परेशानी किससे और कैसे साझा करे। कौन सुनेगा ?कौन समझेगा ?  बाते चार लोगो तक पहुंची तो लोग क्या कहेंगे। हजार बाते बनाएंगे । उन्हें कमजोर समझेंगे........! बस असुरक्षा की भावना उन्हें अपने सारे दुःख दर्द अपने तक समेटकर रखने पर मजबूर कर देती  है । यहाँ तक कि वो डॉक्टर के सामने  भी अपनी आधी  परेशानी छुपा लेते हैं ।किसी बीमारी का इलाज तभी सम्भव होता है जब उसके सही कारणों का पता हो वरना  छोटी- छोटी बीमारियों का लम्बा इलाज चलने से मानसिक असंतुष्टि और अधिक बढ़ जाती है ।

लाइफस्टाइल में बदलाव करना (Making Lifestyle Changes) - 

अगर आपका कोई दोस्त,कोई विस्वासपात्र रिश्तेदार नही जिससे सारी मन की बाते कह सको (मेरे पास भी नही था)  तो कलम उठाइये और सारी बाते लिख डालिये। अच्छी-बुरी जो भी हो,जैसी भी हो जो आपको बार-बार परेशान करती हों ,,बस लिख  डालिये ।डायरी में,ब्लॉग पर ,फेसबुक पर.......! कही भी ...! इससे आपकी  घुटन को शब्द मिलेंगे  उसे बाहर निकालने का जरिया मिलेगा । आपको आपके विचारों को शब्दों में ढालने की सुविधा होगी । मैं भी गुजरी हूँ उस स्तिथि से अगर उस समय मैंने कलम ना थामी होती तो अब तक मैं बिखर चुकी होती।
जब कभी आपको दिखे कि आपका कोई दोस्त कोई रिश्तेदार तनाव में है या अचानक  चिडचिडा हो  गया है तो समझ लीजिये कि वो डिप्रेशन की और बढ़ रहा है ,,उसे अकेला मत  छोड़िये ।प्रत्यक्ष रुप से भले ही उसकी परेशानी मत पूछिये पर उससे हल्की-फुलकी इधर-उधर की  बातें करते रहिये ।उसे यह अहसास दिलाते रहिये कि वो अकेला नही आप भी उसके साथ है । हो सकता है  आपका कुछ समय का साथ किसी की सोच किसी की जिन्दगी बदल दे । किसी की  घुटन  किसी की मानसिक  छटपटाहट  किसी के मन में दवा पड़ा  कोई पुराना  सा दुःख दूर करने में उसकी मदद कर दे ।उसे जीने की कोई  नई  वजह दे दे ।कभी किसी अवसादग्रस्त व्यक्ति के लिए ऐसे मूक श्रोता बनिये कि वो निश्चिंत होकर अपनी सारी बातें सारी उलझन आपसे कह डाले । भले ही आप उसे कोई समाधान न सुझा पायें पर उसका मन जरुर हल्का हो जायेगा या ऐसा भी हो सकता है कि आपकी कही कोई  बात,आपका कोई सुझाव उसकी जिन्दगी बदल दे। इसलिए अपने तक सीमित मत रहिये ।खुद को खोलिए इतना कि दूसरा भी  आपके सामने खुद को खोलने पर मजबूर  हो जाये ।अकेले रहकर उदासी के घेरे को मजबूत मत करिये। दुनिया से जुड़िये ।इन  घेरो को तोड़िए और दूसरो की भी इन घेरों से बाहर आने में मदद करिये ।

किसी को अपना सपोर्ट सिस्टम बनाइये,किसी का सपोर्ट सिस्टम बनिये ।






मीनाक्षी वशिष्ठ
जन्म स्थान ->भरतपुर (राजस्थान )
वर्तमान निवासी टूंडला (फिरोजाबाद)
शिक्षा->बी.ए,एम.ए(अर्थशास्त्र) बी.एड
विधा-गद्य ,गीत ,प्रयोगवादी कविता आदि।

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