सूफी काव्य धारा की विशेषता sufi kavya dhara ki visheshta सूफी काव्यधारा का परिचय सूफी काव्य धारा के पहले कवि sufi kavya dhara ki visheshta sufi kavya in hindi sufi kaviyon ke naam sufi kavya ka mukhya uddeshya kya tha sant kavya ki visheshta sufi kavya dhara सूफी काव्य परंपरा सूफी काव्य की विशेषताएँ प्रेमाख्यानक काव्य परंपरा प्रेमाख्यान काव्य सूफी संतों की शैली क्या है सूफी काव्य धारा का संक्षिप्त परिचय दीजिए sufi kavya dhara ka parichay sufi kavya parampara me jayasi ka sthan sufi kavi in hindi
सूफी काव्य धारा की विशेषता
sufi kavya dhara ki visheshta
सूफी काव्यधारा का परिचय सूफी काव्य धारा के पहले कवि sufi kavya dhara ki visheshta sufi kavya in hindi sufi kaviyon ke naam sufi kavya ka mukhya uddeshya kya tha sant kavya ki visheshta sufi kavya dhara सूफी काव्य परंपरा सूफी काव्य की विशेषताएँ प्रेमाख्यानक काव्य परंपरा प्रेमाख्यान काव्य सूफी संतों की शैली क्या है सूफी काव्य धारा का संक्षिप्त परिचय दीजिए sufi kavya dhara ka parichay sufi kavya parampara me jayasi ka sthan sufi kavi in hindi - सूफी काव्यधारा अथवा प्रेममार्गी शाखा भक्तिकालीन हिंदी काव्यधारा की एक प्रमुख धारा के रूप में विख्यात है .प्रेममार्गी शाखा को पल्लवित करने के श्रेय सूफी मुसलमान कवियों को है .इसीलिए ऐसे सूफी काव्यधारा भी कहा जाता है .निर्गुण मार्गी भक्तों ने हिन्दुओं और मुसलामानों को पास - पास लाने का जो प्रयास शुरू किया उसे संत कवियों ने तो हिन्दू और मुसलमान दोनों के कर्मकांड की तीखी आलोचना करके अंत साधना पर बल देकर यह एकता लानी चाही ,पर सुफिओं साधकों ने शुद्ध प्रेम का मार्ग अपनाया और उसके द्वारा दोनों को निकट लाने का प्रयास किया .इन प्रेमाश्रयी कवियों की प्रेम पद्धति पास के सूफीयो के अनुसरण पर थी ,इसीलिए इन कवियों को सूफी कवि कहते हैं .सूफी प्रेम पद्धति में ईश्वर को नारी (प्रेमिका ) और जीवात्मा (साधक ) को पुरुष (प्रेमी ) के रूप में कल्पित किया जाता है .अतः यह पद्धति भारतीय भक्ति पद्धति से एकदम उलटी है ,जिसमें भक्त अपने को स्त्री रूप में और भगवान् को पति रूप में मानकर साधना करता है .इस शाखा के प्रमुख कवि जायसी है .
१. प्रेमकथाओं का वर्णन -
२. हिन्दू संस्कृति का चित्रण -
३. लौकिक प्रेम द्वारा अलौकिक प्रेम की व्यंजन -
ये सभी कवि सूफी थे ,इसीलिए इन्होने अपने धार्मिक सिधान्तों का भी काव्यात्मक निरूपण किया है .सूफी सिद्धांत के अनुसार लौकिक प्रेम के माध्यम से ही अ लौकिक प्रेम की प्राप्ति संभव है . इन कवियों ने स्वचाहंद प्रेम की अभिव्यक्ति की है .लेकिन सामाजिक मर्यादाओं का कहीं अतिक्रमण नहीं किया .क्योंकि इन गाथाओं द्वारा अलौकिक प्रेम की व्यंजन की गयी है .साधक आत्मा अपनी प्रियतमा परमात्मा के प्रेम के वशीभूत होकर उससे मिलने का प्रयास करता है .४. रहस्यवादी भावना -
ये कवि निराकार से प्रेम करते थे ,इसीलिए ये सच्चे अर्थों में रहस्यवादी थे .इनके अनुसार यह संसार उस परब्रह्म की छाया है .यहाँ जो कुछ भी सुन्दर और शोभन है वह उसी का प्रतिबिम्ब है .
५. विरह की साधना -
६. मसनबी शैली -
७. मुसलमान कवि -
८. भाषा छंद और अलंकार -
भाषा के रूप में इन सभी कवियों ने पूरबी - अवधी का प्रयोग किया है ,जो पशिमी अवधी के अपेक्षा कम साहित्यिक व बोलचाल की भाषा के अधिक निकट होने से बड़ी सहज और मीठी है .छंद के रूप में इनके द्वारा दोहे - चौपाई का प्रयोग बड़ा समीचीन है ,क्योंकि अवधी के अपने छंद है जो उसमे बहुत फबते हैं .अलंकारों में इनके सबसे प्रिय अलंकार अमसोक्ति और उत्प्रेक्षा है .इसके अतिरिक्त उपमा ,रूपक ,विरोधाभाष आदि अलंकार भी बहुत सुन्दर रूप में प्रयुक्त हुए हैं .प्रमुख सूफी कवि -
सूफी प्रेमगाथाओं में कालक्रम से पहला नाम मुल्ला दाउद की चंदयन का मिलता है ,जो की सन १३७७ में रची गयी थी .इसके अतिरिक्त अन्य प्रमुख सूफी कवि है - मृगावती के रचियता शेख कुतबन, मधुमालती के कवि मंझन ,पद्मावत , आखिरी कलाम ,अखराबर के जायसी ,चित्रावली के रचनाकार उस्मान आदि . मालिक मुहम्मद जायसी इस धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं .विडियो के रूप में देखें -

बहुत ही उपयोग विषय है इसके लिए शुक्रिया अदा करना चाहेंगे
जवाब देंहटाएंThank you sir AAP log aise hi help Karte रहिए
हटाएंNice but I want poet names.
जवाब देंहटाएंClass 10 ke project ke liye bahut helpful rha
जवाब देंहटाएंdhanyavaad
Bahut badhiya sirji,thank u
जवाब देंहटाएंबहुत ही ज्ञानवर्धक जानकारी
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया
जवाब देंहटाएंVery nice
जवाब देंहटाएंVery nice
जवाब देंहटाएंvery helpful , please keep posting imp topics like this , thank you
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