खोया हुआ आदमी

SHARE:

गाँव के कुत्ते अब उसके सगे हो गए थे । वे उसके आस-पास ऐसे चलते जैसे उसे ' गार्ड ऑफ़ ऑनर ' दे रहे हों ।

खोया हुआ आदमी

वह आदमी न जाने कहाँ से भटकता हुआ दूर-दराज़ के उस गाँव में पहुँचा था । गाँव के कुत्तों ने जब चीथड़ों में लिपटे उस आदमी को देखा तो उन्हें वह कोई पागल लगा । वे उस पर बेतहाशा भौंकने लगे । कुत्तों की देखा-देखी गाँव के बच्चे भी पूरी दोपहर उसे छेड़ते और तंग करते रहे । संयोग से किसी बड़े आदमी ने गाँव के बच्चों को उस पर पत्थर फेंकते हुए देख लिया । जब वह उस आदमी के क़रीब गया तो उसके चेहरे पर मौजूद खोएपन के भाव के बावजूद उसे उस आदमी में गरिमा के चिह्न दिखे । यह आदमी पागल नहीं हो सकता -- उसने सोचा । गाँव के उस बड़े व्यक्ति ने उस आदमी से उसका नाम-पता पूछा , पर वह कोई उत्तर नहीं दे सका । वह केवल इतना बोल पाया -- शायद मैं खो गया हूँ ! यह सुनते ही गाँव के उस बड़े व्यक्ति ने निश्चय किया कि वे सब उसे ' खोया हुआ आदमी ' कह कर बुलाएँगे ।
खोया हुआ आदमी इतना खोया था , इतना खोया था कि उसकी पूरी स्मृति का लोप हो चुका था । उसके ज़हन से उसका नाम और पता पूरी तरह खो चुके थे । न उसे अपनी जाति पता थी , न अपना धर्म । लेकिन अपने खोएपन में भी उसमें परिचित-जैसा कुछ था , जो उसे अपना-सा बना रहा था । लिहाज़ा जब उसे गाँव के अन्य लोगों के पास ले जाया गया , तो उसे देखते ही सभी एक स्वर में बोल उठे -- अरे , यह खोया हुआ आदमी तो बेहद अपना-सा लग रहा है । उन्होंने उसे अपने ही गाँव में रख लेने का फ़ैसला किया ।
आदमीखोये हुए आदमी की आवाज़ बहुत मधुर थी । कभी-कभी वह अपनी सुरीली आवाज़ में कोई खोया हुआ गीत गाता था तो उस गाँव की गाय-भैंसें जैसे उसके गीत की स्वर-लहरियों से मंत्रमुग्ध हो कर ज़्यादा दूध देने लगतीं । गाँव के बच्चे उसका गीत सुनकर उसकी ओर खिंचे चले आते । गाँव के बड़े-बुज़ुर्गों को भी उसके गीत उनकी युवावस्था के सुंदर अतीत की याद दिलाते । गाँव के लोगों ने पाया कि जब से वह खोया हुआ आदमी वहाँ आया था , गाँव के फूल और सुंदर लगने लगे थे , गाँव की तितलियाँ ज़्यादा मोहक लगने लगी थीं , गाँव के जुगनू ज़्यादा रोशन लगने लगे थे । गाँव के बच्चे भी अब ज़्यादा खुश रहने लगे थे क्योंकि बच्चों को वह सम्मोहित कर देने वाले कमाल के गीत सुनाता था । गाँव के कुत्ते अब उसके सगे हो गए थे । वे उसके आस-पास ऐसे चलते जैसे उसे ' गार्ड ऑफ़ ऑनर ' दे रहे हों ।
               उन्हीं दिनों गाँव की एक वृद्धा को सपना आया कि वह खोया हुआ आदमी दरअसल उसका बेटा था जो बचपन में कहीं खो गया था । तब से वह उस खोए हुए आदमी को अपना बेटा मानने लगी । वह एक ग़रीब स्त्री थी जो घास काटकर , उपले थापकर , और पेड़-पौधों की लकड़ियाँ इकट्ठा कर के अपना जीवन चलाती थी । उसने खोए हुए आदमी को अपने सपने के बारे में बताया । खोए हुए आदमी ने ख़ुशी-ख़ुशी उस वृद्धा को अपनी माँ मान लिया , और उसके साथ रहने लगा । उसने अपनी
' माँ ' की इतनी सेवा की कि वृद्धा को लगा कि उसका जीवन धन्य हो गया ।
               धीरे-धीरे गाँववालों को खोये हुए आदमी के कई गुणों के बारे में पता चलने लगा । वह पशु-पक्षियों से बातें करता प्रतीत होता । लगता था जैसे वह पशु-पक्षियों की भाषा जानता था । वह आँधी , तूफ़ान , चक्रवात् आने , ओले पड़ने या टिड्डियों के हमले के बारे में गाँववालों को पहले ही आगाह कर देता । उसकी भविष्यवाणी के कारण गाँववाले मुसीबतों से बच जाते । जब एक बार गाँव में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई तो खोए हुए आदमी ने आकाश की ओर देखकर न जाने किस भाषा में किस देवता से प्रार्थना की । कुछ ही समय बाद गाँव में मूसलाधार बारिश होने लगी । सूखी मिट्टी तृप्त हो गई और बच्चे-बड़े सभी इस झमाझम बारिश में भीगने का भरपूर आनंद लेने लगे । उस दिन से खोया हुआ आदमी गाँव में सबका चहेता हो गया ।
               गाँव के किनारे कुछ घर दलितों के थे और कुछ मुसलमानों के । गाँव की ऊँची जाति के लोग उनसे अलग रहते थे । खोए हुए आदमी ने दलितों और मुसलमानों से भी मित्रता कर ली । वह रोज़मर्रा के कामों में उनकी मदद कर देता । उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताता । देखते-ही-देखते गाँव के दलित अपने हक़ की माँग करने लगे । उधर गाँव के बड़े-बूढ़ों पर भी खोए हुए आदमी के समझाने का असर
हुआ । धीरे-धीरे दलितों का शोषण बंद हो गया । आपसी भाईचारा बढ़ने लगा । गाँव के दलितों और मुसलमानों के प्रति ऊँची जातियों के लोगों का व्यवहार सुधरने लगा । गाँव के दलितों को गाँव के कुएँ से पानी लेने की सुविधा मिल गई । उन्हें गाँव के मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार मिल गया । गाँव के हिंदू और मुसलमान मिल जुल कर ईद और होली-दीवाली मनाने लगे । इस तरह गाँव में साम्प्रदायिकता और जातिवाद को दूर करने में खोए हुए आदमी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
               उसके आने से गाँव में एक और बदलाव आया । गाँव में स्त्रियों की दशा ठीक नहीं थी । खोए हुए आदमी ने स्त्रियों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया । गाँव की सभी स्त्रियाँ पुरुषों की ज़्यादतियों के ख़िलाफ़ एकजुट हो गईं । खोए हुए आदमी के समझाने का असर भी हुआ । धीरे-धीरे स्त्रियों के विरुद्ध अत्याचार समाप्त हो गया । उन्हें भी सम्मान मिलने लगा ।
              इस गाँव से क़रीबी क़स्बे की दूरी तीन दिन की थी । गाँव में खेती की ज़मीन तो थी पर कभी बीज नहीं मिलता , कभी खाद नहीं मिलता । खोए हुए आदमी ने गाँववालों को प्रेरित किया कि वे गाँव में ही अच्छे बीज और जैविक खाद की दुकान खोल लें । वह खुद लोगों के खेत में मेहनत करता , खेती-बाड़ी में उनकी मदद करता ।
लगता जैसे उसके हाथों में जादू था । उसकी मदद गाँववालों के लिए ख़ुशहाली ले आई । गाँव का तालाब मछलियों से भर गया । गाँव में उगे फलों के पेड़ फलों से लद गए । खेतों में फ़सलें लहलहाने लगीं । मौसम अच्छा बना रहा । गाँव वालों ने इन सब का श्रेय खोए हुए आदमी को दिया । उन्हें लगा जैसे उसकी मौजूदगी में बरकत थी । धीरे-धीरे वह पूरे इलाक़े में लोकप्रिय हो गया । पड़ोस के अन्य गाँवों के लोग भी उसके मुरीद बन गए ।
              शुरू-शुरू में कुछ लोग उसे प्रश्नवाचक निगाहों से देखते थे । पर खोए हुए आदमी कि का चेहरा इतना विश्वसनीय था और उसका व्यवहार इतना सरल और सहज था कि धीरे-धीरे उसके आलोचक भी उसके प्रशंसकों में बदल गए । लोगों को लगता था कि उसके पास कोई जादुई शक्ति थी जिससे वह आसानी से समस्याओं के हल ढूँढ़ लेता था । हालाँकि खोए हुए आदमी ने हमेशा इस बात का खंडन किया ।
वह लोगों से कहता -- " आप सब के पास भी वही शक्तियाँ हैं । खुद को पहचानो ।
अपनी ऊर्जा को रचनात्मक और सकारात्मक कामों में लगाओ । जुड़ो और जोड़ो । "
सुशांत सुप्रिय
सुशांत सुप्रिय
इस तरह खोए हुए आदमी ने इलाक़े के लोगों में नया विश्वास भर दिया । लोगों में नया जोश , नया उत्साह आ गया ।
पर अंत में वह दिन भी आ पहुँचा । एक रात मौसम बेहद ख़राब हो गया । बादलों की भीषण गड़गड़ाहट के साथ पूरे आकाश में बिजली कड़कने लगी । तभी कई सूर्यों के चौंधिया देने वाले प्रकाश ने रात में दिन का भ्रम उत्पन्न कर दिया ।
फिर वज्रपात जैसी भयावह गड़गड़ाहट के साथ गाँव में कहीं बिजली गिरी ।  लोग अपनी साँसों की धुकधुकी के बीच अपने-अपने घरों में दुबके हुए थे । सारी रात मौसम बौराया रहा । लोगों का कहना है कि उस रात गंधक की तेज़ गंध पूरे गाँव में फैल गई थी , और मकानों की खिड़कियों-दरवाज़ों की झिर्रियों में से घुस कर यह तीखी गंध सभी घरों में समा गई थी ।
सुबह जब मौसम साफ़ हुआ तब गाँववालों ने पाया कि वह खोया हुआ आदमी अब उनके बीच नहीं था । वह ग़ायब हो चुका था । गाँववालों ने उसे बहुत ढूँढ़ा पर उसका कोई पता नहीं चला । न जाने उसे ज़मीन निगल गई थी या आसमान खा गया था। उसकी तलाश में आसपास के गाँवों में गए सभी लोग ख़ाली हाथ वापस लौट आए । गाँव की गलियाँ उसके बिना सूनी लगीं । पशु-पक्षी उसके बिना उदास लगे । गाँव के बच्चे उसके बिना बेचैन लगे । गाँव के कुत्तों की आँखों में भी आँसू थे ।
                दुखी गाँववालों ने खोए हुए आदमी की याद में उसकी एक मूर्ति बना कर गाँव के बीचोंबीच स्थापित कर दी । पंचायत की सभी बैठकें अब इसी मूर्ति के पास हुआ करतीं । गाँववालों ने प्रण लिया कि वे उस खोए हुए आदमी के दिखाए मार्ग पर चलेंगे । आज भी यदि आप उस गाँव में जाएँगे , तो आपको उस खोए हुए आदमी की वहाँ स्थापित मूर्ति दिख जाएगी ।
               लेकिन अापको असली बात बताना तो मैं भूल ही गया । खोए हुए आदमी के ग़ायब होने के कुछ समय बाद जब जनगणना अधिकारी सेंसस के काम से इस गाँव में पहुँचे , तो वे यह देख कर हैरान रह गए कि गाँव में किसी को भी न तो अपनी जाति याद थी , न अपना धर्म याद था । धर्म और जाति के बारे में उनकी स्मृतियाँ उस खोए हुए आदमी के साथ ही जैसे सदा के लिए खो चुकी थीं । काश , अपने शहर में हमें भी ऐसा खोया हुआ आदमी मिल जाता ...

                         ------------०------------

प्रेषक : सुशांत सुप्रिय
           A-5001 ,
           गौड़ ग्रीन सिटी ,
           वैभव खंड ,
           इंदिरापुरम् ,
           ग़ाज़ियाबाद - 201014
           ( उ. प्र. )
मो : 8512070086
ई-मेल : sushant1968@gmail.com

                       ------------0------------

COMMENTS

BLOGGER: 2
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

Advertisement

इन्हें भी पढ़ें -

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,58,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,2,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,9,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,10,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,176,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,4,कविता,621,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,1,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,1,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,32,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,80,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,8,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,8,जयशंकर प्रसाद,18,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,11,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,1,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,15,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,124,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,60,प्रेमचंद,22,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,68,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,96,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,59,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,6,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,1,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,40,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,11,राजभाषा हिंदी,46,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,17,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,62,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,16,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,3,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शैक्षणिक लेख,9,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संस्मरण,9,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,11,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,12,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,17,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,16,सूरदास,4,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,9,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,138,हिंदी लेख,277,हिंदी समाचार,62,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,5,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,31,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,38,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,42,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,8,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,55,Beauty Tips Hindi,3,English Grammar in Hindi,3,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,6,hindi essay,130,hindi grammar,49,Hindi Sahitya Ka Itihas,37,hindi stories,436,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,7,naya raasta icse,8,Notifications,5,question paper,8,quizzes,8,Shayari In Hindi,11,sponsored news,2,Syllabus,7,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,15,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: खोया हुआ आदमी
खोया हुआ आदमी
गाँव के कुत्ते अब उसके सगे हो गए थे । वे उसके आस-पास ऐसे चलते जैसे उसे ' गार्ड ऑफ़ ऑनर ' दे रहे हों ।
https://3.bp.blogspot.com/-7au4f7-2Icc/WDpWI81IitI/AAAAAAAAEQo/OKupCyz6b-EioVSACPEJuhJVtHit5_TzgCLcB/s1600/aam.jpeg
https://3.bp.blogspot.com/-7au4f7-2Icc/WDpWI81IitI/AAAAAAAAEQo/OKupCyz6b-EioVSACPEJuhJVtHit5_TzgCLcB/s72-c/aam.jpeg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2016/11/the-missing-man.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2016/11/the-missing-man.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy