संकल्प ( व्यंग्य )

SHARE:

मिश्राइन का तीन मंजिला घर देखकर गुप्ताइन के करेजा पर रोज ही मोटका अजगर रेंगता था। अइसा नहीं था कि गुप्ताइन कवनो किराया के घर में रहती थीं।

संकल्प (व्यंग्य )

मिश्राइन का तीन मंजिला घर देखकर गुप्ताइन के करेजा पर रोज ही मोटका अजगर रेंगता था। अइसा नहीं था कि गुप्ताइन कवनो किराया के घर में रहती थीं। लेकिन कहां पांच बड़े-बड़े कमरों वाला तीन मंजिला घर, आ कहां तीन कमरे का एक छोटा सा घर। उसमें भी बाहर बिना पलस्तर की दीवार आ लैट्रीन-बाथरूम के ऊपर एस्बेस्टस की छत।
जब भी गुप्ताइन मिश्राइन के घर जातीं तो उनकी आवभगत से जितना प्रभावित होतीं, उनके टाइलस लगे फर्श और मंहगे सोफासेट को देखकर मन ही मन उतनी ही आहें भरतीं। काश कि गुप्ताजी भी खूब पढ़-लिखकर मिश्राजी की तरह आयकर अधिकारी बन जाते, अधिकारी ना सही त इंसपेक्टर ही हो जाते तो उनके ठाठ-बाट भी मिश्राइन की तरह होते तो सही। तीन मंजिला ना सही, दु मंजिला घर त होता ही। लेकिन गुप्ताजी को तो पढ़ने में मन ही नहीं लगता था।
साथ ही त पढ़ते थे मिश्राजी आ गुप्ताजी। जहां मिश्राजी मैट्रिक में टाॅप किए थे, वहीं गुप्ताजी मैट्रिक में तीन बार फेल हो गए थे। हार-पाछ के गुप्ताजी के बाबूजी ने उनके लिए एक किराने की दूकान खोल दी और गुप्ताइन से बिआह कर दिया। साल भर की भीतर ही छोटे गुप्ताजी उन दोनों के घर पधार गए थे। जब तक गुप्ताजी के दोनों भाई कुंवारे थे, वे दोनों बाबूजी के घर में ही रहे। इसीलिए ना घर छोटा लगा, ना पैसे की कमी अखरी। लेकिन जब गुप्ताजी के दोनों भाइयों का भी बिआह हो गया तो आए दिन कलह होने लगा। रोज-रोज के किचकिच से तंग आकर बाबूजी ने अपना तीन मंजिला घर बेच दिया आ तीनों बेटों को एक-एक घर खरीद दिया। आ दोनो पति-पत्नी गांव जाकर खेती-बाड़ी कराने लगे।
शुरू-शुरू में त अपनी अकेली गृहस्थी में गुप्ताइन को बड़ा आनंद आया। कुल पांच प्राणी - दो लड़का, एक लड़की आ दोनों पति-पत्नी, का काम करते गुप्ताइन फूली ना समातीं। अब त न किसी का रोक था न टोक। अपनी गृहस्थी की अकेली मलकिनी थीं। लेकिन साल भर के भीतर ही अकेले रहने का सारा मजा गायब हो गया। सीमित आमदनी में घर चलाने की मजबूरी आ गई। शुरू में त गुप्ताजी ने गुप्ताइन को अपनी दूकान की हालत बताई ही नहीं, लेकिन आखिर कब तक छुपाते। आखिर गुप्ताइन को पता चल ही गया कि गुप्ताजी सिर्फ पढ़ने-लिखने में ही कच्चे नहीं हैं बल्कि दूकान-दौरी में भी कच्चे ही हैं। इस बात का पता चलते ही गुप्ताइन ने दूकान संभालने की कमान अपने हाथ में ले ली। दूकान चल भी पड़ी, लेकिन उससे इतनी आमदनी नहीं होती थी कि मिश्राजी के ठाठ की बराबरी की जा सके।
ऐसा नहीं था कि मिश्राजी कवनो घूसखोर थे, लेकिन कवनो साध भी नहीं थे। बिना मांगे जो कुछ भी मिल जाता था, उसे भोले बाबा का परसाद समझकर घर पर भिजवा देते थे। दूसरे, उनकी पत्नी भी हाईस्कूल की हेडमास्टरनी थीं, सो उनके पास तो तीन तरफा आमदनी थी। देखते-देखते ही उन्होंने गुप्ताजी के घर के सामने की बड़ी सी खाली पड़ी जमीन खरीद ली आ साल भर में ही तीन मंजिला घर पिटवा लिया। जैसे-जैसे मिश्राजी का घर बनता जा रहा था, गुप्ताइन की छाती फटी जा रही थी।
तरु श्रीवास्तव
तरु श्रीवास्तव
मिश्राइन एक भली महिला थीं, सो अपने आस-पड़ोस के लोगों से जल्द ही उनके रिश्ते मधुर बन गए। गुप्ताइन भी गाहे-बगाहे मिश्राइन के पास चली जाती थीं, मिलने कम घर निहारने ज्यादा। खैर, एक दिन बातों-बातों में गुप्ताइन ने मिश्राइन से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का उपाय पूछ डाला। उपाय के तौर पर मिश्राइन ने गुप्ताइन को अपनी दूकान पर किराने के सामान के अलावा महिलाओं के मेकअप, चूड़ी, कपड़े आदि बेचन का सुझाव भी दे डाला। मिश्राइन का सुझाव काम भी कर गया। अब गुप्ताइन को पहले के मुकाबले दोगुनी आमदनी होने लगी थी। वह अब पहले से ज्यादा खुश रहने लगी थीं। लेकिन यह आमदनी इतनी भी ज्यादा नहीं थी जो उनके घर को तीन मंजिला घर में बदल सके आ मिश्राइन के हैसियत की बराबरी कर सके। लेकिन बहुत जल्द गुप्ताइन को अपनी आमदनी दिन दूनी रात चैगुनी बढ़ाने का एक सूत्र हाथ लग ही गया।
हुआ कुछ अइसा, एक दिन गुप्ताइन के दूर की मामी उनसे मिलने आईं। गुप्ताइन का हाल उनसे देखा न गया, सो उन्होंने अपने पति से कहकर गुप्ताजी को ठेकदारी का काम दिलवा दिया। गुप्ताइन के माम सड़क बनाने के लिए ठेके लिया करते थे, लेकिन उम्र बढ़ने के कारण अब वो उतनी भाग-दौड़ नहीं कर पा रहे थे। दूसरे, उनके बच्चे विदेश में बस गए थे। अकेलापन और पैसे कमाने के मोह में उन्होंने गुप्ताजी को अपने साथ काम पर लगा लिया था। यह गुप्ताइन की कड़ी हिदायत का ही असर था कि इस काम में गुप्ताजी को बरकत होने लगी।
असल में जिस पहली जनवरी को गुप्ताइन की मामी ने गुप्ताजी को इस काम के बारे में बताया था, बस उसी पल गुप्ताइन ने गुप्ताजी को यह संकल्प दिला दिया था कि आज से बेइमानी परमो धरमः। सड़क चाहे छह महीने में टूट जाए, लेकिन उनका टाइल्स वाला तीन मंजिला मकान दो साल में बन जाना चाहिए।
देखते-देखते गुप्ताजी के घर पर भी लक्ष्मी बरसने लगी। जिस तीन मंजिला घर के लिए गुप्ताइन बरसों से तरस रही थीं, गुप्ताजी के ठेकेदारी शुरू करने के पांच बरस के भीतर ही वह तीन-तीन तीन मंजिला घर की मलकिनी बन चुकी थीं। शायद गुप्ताजी ने एक जनवरी को लिए अपने संकल्प को कुछ ज्यादा ही सख्ती से अमल में लिया था।
आज तो गुप्ताइन के पैर जमीन पर ही नहीं पड़ रहे थे। जिस मोहल्ले में मिश्राइन के घर और उनके ठाठ-बाट की चर्चा होती थी, आज उसी मोहल्ले में बच्चे-बच्चे की जुबान पर गुप्ताजी आ गुप्ताइन के घर की चर्चा थी। असल में गुप्ताजी अपने काम यानी पैसे कमाने में इतना ज्यादा मगन हो गए थे कि उचित-अनुचित सब ताक पर रख दिया था और इसकी भनक आयकर विभाग को भी लग गई थी। दोस्ती के लिहाज से कई बार तो मिश्राजी ने यह छापा रूकवा दिया था और गुप्ताजी को संभलकर पैसे कमाने की सलाह दी थी। लेकिन गुप्ताजी अपने संकल्प को पूरा करने में इतने मगन थे कि मिश्राजी की बातें उनके कानों तक पहुंचती ही नहीं थी। खैर, जब विभाग की ओर से छापा डालने का दबाव पड़ने लगा तब हारकर मिश्राजी ने हरी झंडी दिखा दी। खुद के ऊपर कोई दोष न आए इसलिए मिश्राजी सपरिवार छुट्टी मनाने सिंगापुर चले गए और बाकी के अधिकारियों को गुप्ताजी के यहां छापा माने का निर्देश दे गए।
आज ही दिन में गुप्ताजी के यहां आयकर का छापा पड़ा था। छापे में ज्यादा कुछ तो नहीं मिला था। एक करोड़ रुपया आ पांच किलो सोना के सिवा आयकर विभाग को और कुछ भी नहीं मिला था। लेकिन इस बात ने गुप्ताइन का रूतबा जरूर बढ़ा दिया था। आज तो पूरे मोहल्ले में उनके धनवान होने की चर्चा थी। और हो भी क्यों न, सच की जगह झूठ का परचम जो आज बुलंद हुआ था। छापा पड़ना हमारे-आपके लिए शर्म की बात हो सकती है, लेकिन इस कारण गुप्ताइन की आज बरसों की इच्छा जो पूरी हुई थी। आज पूरे मोहल्ले के चर्चा का केंद्र वही तो थीं। आज मिश्राइन की जगह उनके ठाठ-बाट की चर्चा थी। 
हां, यह और बात थी की इस छापे को डलवाने के लिए गुप्ताजी ने ही मिश्राजी को कहा था। इस एवज में गुप्ताजी ने मिश्राजी को मिठाई खाने के लिए 25 लाख रुपए दिए थे और सिंगाुपर घूमने का टिकट भी।
सुनिए साहब, अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है। इस छापे के साल भर के भीतर ही गुप्ताजी एक क्षेत्रीय राजनैतिक पार्टी के वरिष्ठ पद को सुशोभित कर रहे थे। अब तो बस गुप्ताइन को उस दिन का इंतजार है, जब गुप्ताजी को अगले चुनाव में उनके मनपसंद चुनाव क्षेत्र से टिकट मिलेगा और वो मंत्री बनकर सत्ता का सुख भोगेंगे। तभी जाकर एक जनवरी को लिया गया संकल्प सही माने में पूरा होगा।

यह रचना तरु श्रीवास्तव जी द्वारा लिखी गयी है . आप कविता, कहानी, व्यंग्य आदि साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन कार्य करती हैं . आप पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2000 से कार्यरत हैं। हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, हरिभूमि, कादिम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में बतौर स्वतंत्र पत्रकार विभिन्न विषयों पर कई आलेख प्रकाशित। हरिभूमि में एक कविता प्रकाशित। दैनिक भास्कर की पत्रिका भास्कर लक्ष्य में 5 वर्षों से अधिक समय तक बतौर एडिटोरियल एसोसिएट कार्य किया। तत्पश्चात हरिभूमि में दो से अधिक वर्षों तक उपसंपादक के पद पर कार्य किया। वर्तमान में एक प्रोडक्शन हाऊस में कार्यरत हैं.आकाशवाणी के विज्ञान प्रभाग के लिए कई बार विज्ञान समाचार का वाचन यानी साइंस न्यूज रीडिंग किया।

COMMENTS

LEAVE A REPLY

Advertisements

आपको ये भी रोचक लगेगा

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,58,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,10,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,177,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,675,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,1,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,34,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,84,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,8,गोरख पाण्डेय,2,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,20,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,18,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,1,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,132,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,65,प्रेमचंद,22,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,74,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,111,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,59,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,6,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,11,राजभाषा हिंदी,47,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,18,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,72,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,21,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,4,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,11,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,9,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,18,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,13,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,17,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,4,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,9,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,162,हिंदी लेख,306,हिंदी समाचार,67,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,5,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,31,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,50,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,8,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,57,Beauty Tips Hindi,3,English Grammar in Hindi,3,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,9,hindi essay,154,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,51,hindi stories,456,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,Notifications,5,question paper,9,quizzes,8,Shayari In Hindi,12,sponsored news,2,Syllabus,7,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,15,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: संकल्प ( व्यंग्य )
संकल्प ( व्यंग्य )
मिश्राइन का तीन मंजिला घर देखकर गुप्ताइन के करेजा पर रोज ही मोटका अजगर रेंगता था। अइसा नहीं था कि गुप्ताइन कवनो किराया के घर में रहती थीं।
https://2.bp.blogspot.com/-UcLp920G8UU/V30cHwSpUbI/AAAAAAAAB68/c4ue_0i0vfgIjBdeCBOTQnPOQHX3KRzagCLcB/s200/taru.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-UcLp920G8UU/V30cHwSpUbI/AAAAAAAAB68/c4ue_0i0vfgIjBdeCBOTQnPOQHX3KRzagCLcB/s72-c/taru.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2016/10/irony-oath.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2016/10/irony-oath.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content