अनमोल क्षण (हिंदी कहानी)

SHARE:

एक शरारती बच्चे की तरह ठंड़ गुदगुदाने के लिये छाँक-छाँककर जगह ढुँढ़ रही थी।

एक शरारती बच्चे की तरह ठंड़ गुदगुदाने के लिये छाँक-छाँककर जगह ढुँढ़ रही थी। सिर के टोपे और कोटे के कालर के बीच, दस्ताने और ऊपर खिसकी बाँह के अंदर, पैर के मोजे और पतलून की मोहरी के बीचचश्मे के नीचे मेरी लंबी नाक की दो सुरंगों को देख वह ठंड़ तो खिलखिलाकर लगातार गुदगुदाने में मस्त हो उठी थीमैंने महसूस किया कि ठंड़ शरारती ही नहीं, बच्चों जैसी जिद्दी भी होती है
मैं कोहरे को चीरता जैसे ही एयरपोर्ट पहुँचा तो देखा कि वहाँ पहले से आये मुसाफिरों के मुरझाये चेहरे ठिठुर रहे थेमैं अटैची घसीटता आगे बढ़ाउड़ान को देर थी'मैं वक्त पर आ गया हूँ,' मैं बुदबुदाया
'तुम मूर्ख हो,' यह जताने ऊपर लगा मानीटर दमक रहा थालिखा था कि कुहरे के कारण उड़ान देर से होगी
'उड़ान रद्द भी हो सकती है,' किसी ने कँपकँपाती आवाज में अपनी पत्नी से कहासभी यात्री कुर्सियों पर बैठे थेहरेक ने दो कुर्सियाँ हथिया रखी थींएक खुद के बैठने के लिये और दूसरी अपना हेंड़बैग रखनेमुसाफिरों में कुछ भारतीय थे और शेष विदेशीलेकिन दो कुर्सियों पर कब्जा करने का तरीका सबका एक-सा था। तीन घंटे हेंड़बैग थामे भला कौन खड़ा रह सकता है? इतने लंबे इंतजार में सब 'एटीकेट' चकनाचूर हो जाता हैंमैं फर्श पर उखडूँ बैठ गयानीचे बिछी 'टाइलस्' बर्फ-सी थीं। पर सिर को घुटनों और हथेलियों के बीच दुबकना अच्छा लग रहा था
लोग आपस में बतिया रहे थेठंड़ में खुसफुसाहट शोर की तरह सुनाई पड़ रही थीलोग व्यवस्था की बिंगे निकाल रहे थे - मौसम को दोष दे रहे थेस्वयं को भाग्यहीन कहनेवाले कह रहे थे, 'मैं जब भी यात्रा पर निकलता हूँ तो कम्बख्त ट्रेन को तभी लेट होना होता है। हवाई जहाज से जाने की सोचता हूँ तो उड़ान को 'केंसल' होने की पड़ी रहती है'ईश्वर को भी गैरजिम्मेदार कहनेवालों की कमी नहीं थी। मैं उनकी खुसफुसाहट को सुन, मन बहलाता रहालेकिन कुछ देर बाद जो खुसफुसाहट हो रही थी वह थम गईसन्नाटे में ठंड़ी हवा की आवाज भी सताने लगती हैमैं बचपन में हवाई जहाज पर लिखे निबंध को याद करने लगामहासागर पार जाने के लिये हवाई उड़ान सबसे सरल माध्यम हैइससे समय की बचत होती हैयात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाता हैये सारी बातें जो बच्चे लिखते थे, खोखली नजर आ रहीं थीइसकी वजह एक ही थी, जिसे अंग्रेजी में बोरडम और हिन्दी में बोरियत कहते हैंबोरियत का अर्थ है बैठे-ठाले बेफजूल बातें सोचकर खिन्न होना, दिमाग को खंगालकर निरर्थक विचारों को उबाल देना, चित्त को अव्यवस्थित कर चिंता की कंटीली झाड़ियों में उलझाना, मन को फुरसतिया समझकर इधर-उधर दौड़ाकर थकान पैदा करना, खुद को जबरजस्त टोंचा देकर बेचैन करना, भाग्य को कोसकर स्वतः को हताश का पुलिंदा बना लेना, फिर अनावश्यक पुरानी यादों को तोड़-मरोड़कर स्मरण करना और अंत में इन सब को मिलाकर बनी बोरियत की सलाद को रह रहकर चखना और मुँह बिचकाना। आप कहेंगे कि सबसे बड़ा बोर वो है जो बोरडम की हालात में बोरियत की परिभाषा करने बैठ जावे
पर किया क्या जा सकता है? ऐसे समय बोरियत के सन्नाटे की खामोशी झुंझलाहट पैदा करनेवाली होती हैउसे तोड़ने की हिम्मत किसी में नहीं होतीतभी मैंने पास की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को उठते देखावे मुझे व मेरे अंतः को खंगालती बोरियत को काफी समय से घूरकर देख रहे थेउनका नाम महादेवन था - चेहरे पर केरलाइट-घनी मूछों में छिपी प्रसन्नता थी जो कुछ कहना चाह रही थी। प्रसन्नता इसलिये भी थी क्योंकि घनी मूँछें कड़कड़ाती ठंड़ में 'मरीनो' ऊन से बुनी स्वेटर की तरह काम करती हैं और ओठों की कँपकँपी को रोकने सहायक होती हैं
मेरा हाथ पकड़कर उन्होंने मुझे उठने कहा और अपनी कुर्सी दे दीअपना ब्रीफकेस नीचे रखकर वे मेरे पास बैठ गये और कहने लगे, 'तीन घंटे इंतजार करना कठिन है। देखो, सबके चेहरे उदास दिख रहे हैंइसकी वजह है कि हमारे पास उन लम्हों की याद करने की चाह नहीं होती जो हमारी जिन्दगी में कभी किसी समय खास उपहार बनकर आये थेचलो, हम उन्हें याद करें - आपस में शेयर करेंये तीन घंटे हमें अभी उपहार में मिले हैं, वर्ना आपस में मिलने की फुर्सत कहाँ मिलती हैसमय को इस तरह रेंगने न दोउन्हें बच्चों की तरह उछल-कुद करने दो। '
महादेवन की आवाज में अपनापन था और ऐसी आवाज में बच्चों की खिलखिलाहट होती है - आकर्षण होता हैसबका ध्यान महादेवन की तरफ गयासब सोचने लगेसन्नाटा तब भी गहराता हुआ बना रहा, पर किसी के भी चेहरे खामोश नहीं दिख रहे थेएक जर्मन यात्री के चेहरे पर प्रसन्नता की रेख प्रगट होने लगी थीमहादेवन ने उसे भाँप लिया'आप अपने जीवन का सबसे अच्छा पल को याद कर सकते हैं?' महादेवन ने उनसे पूछावे सज्जन जैसे इसी उकसाने की
भूपेन्द्र कुमार दवे
प्रतीक्षा में थे
अपने पास बैठी युवती की ओर इशारा करते हुए, वे कहने लगे, 'ये मेरी पत्नी है - मेरी अपनी पसंदमेरी जिन्दगी का सबसे सुनहरा वह क्षण था, जब मैंने इन्हें पहली बार देखा थाशापिंग करना इनका पुराना शौक रहा हैउस समय ये शापिंग कर सड़क पार कर रहीं थीइन्हें जल्दी थीमुझसे आगे होते वक्त इनका भारी-भरकम शापिंगबैग मुझसे टकरा गया। 'सारी' इन्हें कहना था पर कहा मैंने और बिखरा सामान बैग में भरने लगाजाते समय भी इन्होंने 'थैन्कस्' नहीं कहालेकिन कुछ कदम आगे बढ़कर मेरी ओर पलटकर देखा और मुस्कराईमुस्कराहट की भाषा कितनी मधुर होती है, यह मैंने पहली बार जाना'इतना कह वे शर्मा गये।
उनके चुप होते ही उनकी पत्नी ने कहा, 'मेरे जीवन का सबसे सुन्दर पल वह था जब इन्होंने' प्रपोज़ 'किया था। उस दिन मैं बहुत उदास थीमेरी माँ अंतिम साँसों से जूझ रहीं थीतभी ये आये और मुझे छूकर बोले, 'माँ को बता दो कि मैं तुम्हें चाहता हूँ।' यह सुन मेरी माँ मुस्करा उठींतब मेरी माँ की खुशी मेरे चेहरे पर प्रतिबिंबित हो उठी थी'
एक लड़का जो आगे पढ़ाई करने अमेरिका जा रहा था चुप न रह सकाकहने लगा, 'जब मैं सात साल का था तब मैंने स्कूल की रेस में भाग लिया था। मेरे आगे दौड़नेवाला साथी अचानक ठोकर खाकर नीचे गिर पड़ामैंने देखा कि उसके घुटने छिल गये थेमैंने उसे सहारा देकर उठाया - धूल साफ कीउस दौड़ में उसका पहला नंबर आया और मेरा दूसरापुरस्कार लेते समय वह मुझे भीड़ में ढूँढ़ने लगामुझे देख वह मुस्कराया और मेरी ओर ट्राफी हिलाकर कहने लगा, 'आज दौड़ते वक्त मैं ठोकर खाकर गिर गया था। तब मेरे एक साथी ने मुझे उठाकर मेरा हौसला बढ़ायाआज वह इस दौड़ में दूसरे स्थान पर हैलेकिन यदि प्रथम स्थान से भी ऊपर कोई स्थान है तो इस ट्राफी का असली हकदार वही है'तब वह दौड़कर मेरे पास आया और मुझसे लिपट गया। उस पल मैंने जाना कि नम पलकों में इठलाती मुस्कराहट सबसे मोहक होती है'
इस बच्चे के बाद एक-के-बाद-एक सभी अपने सुन्दरतम क्षणों को हम सब से शेयर करते रहे। हमारे साथ एक अंग्रेज महिला भी थीअंग्रेज बिना पूर्व परिचय के 'हैलो-हाय' भी नहीं करते हैंलेकिन मेरी हेवर्थ चुप न रह सकींकहने लगी कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। अतः न तो कोई भाई था और न ही बहनवह मिलनसार भी नहीं रही इसलिये वेलंटाईन डे पर वह अपने आप को सदा अकेला महसूस किया करती थींयह बात उसके पिताजी ने भाँप लीजब वह पाँच साल की थी तब पिताजी ने उसे अपने हाथ से बनाया पहला वेलंटाईन कार्ड दिया थाउस पर एक अकेली चिड़िया घोंसले पर बैठी थी जैसे वह अपने वेलंटाईन को पुकार रही हो और आकाश से प्रभू ईशु उसकी ओर आते दिखाये गये थेइसके बाद हर वेलंटाईन डे पर पिताजी उसे कार्ड देते और साथ में एक गिफ्ट होती - जो पहले चाकलेट होती थी - फिर कलम पेंसिल बन गई और आगे चलकर कीमती अँगूठी का उपहार बन चुकी थीविवाह के बाद भी उसे एक ही वेलंटाईन कार्ड मिलता थापति अपनी व्यस्तता के कारण वेलंटाईन डे को याद भी नहीं रख पाते थेपरिवार की व्यस्तता के कारण स्वयं मेरी भी इस दिन पिताजी के कार्ड के लिये आतुर होना भूल चुकी थीवेलंटाईन डे एक सामान्य औपचारिकता का दिन बन कर रह गया था

एक दिन सुबह-सुबह उसे फोन आया। पिताजी का थावे कह रहे थे, 'बेटी, अस्वस्थता के कारण मैं कार्ड नहीं बना पायाखरीदकर भेजना भी संभव नहीं लगापर तुम बहुत याद आ रही होइसलिये फोन कर रहा हूँ'
इतना कह मेरी भावुक हो उठीफिर कुछ संयत हो कहने लगी, 'फोन रख कर मैं उस दिन पिताजी को याद कर खूब रोयी थी। एक साल बाद आये वेलंटाईन डे ने मुझे फिर रुला दियापिताजी का कार्ड या फोन पर बात करने का प्रश्न ही नहीं थावे गुजर चुके थेमैं उनकी याद में आँसू बहती बालकनी में खड़ी थीतभी किसी ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखामैंने पलटकर देखा तो मेरे पति वेलंटाईन कार्ड व गिफ्ट पैकेट लिये खड़े थेवे कहने लगे, 'प्रिये, आज से मैं तुम्हें इस दिन कभी उदास नहीं होने दूँगा।' मैं उनसे लिपट कर खूब रोईशायद आँसू खुशी के थे क्योंकि पिताजी मुझे मिल गये थे'
इस तरह देखते ही देखते तीन ही नहीं चार घंटे निकल गयेहवाईजहाज उड़ान भरने आ चुका थापर जल्दी में कोई नहीं थाएक वृद्ध महिला ने कहा, 'महादेवनजी, आपने तो कुछ नहीं कहाआपका सबसे शानदार लम्हा कौनसा था? '
महादेवन को संक्षिप्त में कहना था और उन्होंने बस इतना कहा, 'यह जो समय आप सबने मुझे दिया है, वही मेरे जीवन का सबसे सुन्दर व आनंदित करनेवाला समय रहामैं आप सबका आभारी हूँ'
हवाईजहाज पर बैठने हम सब आगे बढ़ेसब चुप थे, तभी एक महिला ने कहा, 'क्या आप सब सोचते हैं कि हम एक बार फिर मिलें?'
हवाईजहाज में बैठकर हम सबके बीच कागजों का आदान-प्रदान होता रहा। हम सभी उसमें अपना नाम व पता लिख रहे थे, इस आशा से कि हमें ईश्वर जरूर एक बार फिर मिलने का अवसर प्रदान करेगा
यात्रा के अंत में मेरे हाथ जो कागज आया, उसमें सभी पच्चीस यात्रियों के नाम-पते लिखे थे। उसमें मेरा भी एक नाम थायह सोच भी महादेवन की थी
कालान्तर, मुझे एक पत्र मिला, जिसमें अमेरिका से महादेवन की पुत्री ने लिखा था, 'आप सबसे मेरे पिताजी हवाई यात्रा में मिले थे। उस समय वे 'टरमिनल केंसर' से पीड़ित थे और मैंने ही उन्हें इलाज के लिये अमेरिका बुलाया थापर मेरी प्रार्थना व यहाँ के डाक्टरों के अथक प्रयास कामयाब नहीं हो सकेवे अब नहीं हैंलेकिन जाते-जाते उन्होंने आप सबको याद किया और वह कागज मुझे दिया जिसमें आपके नाम-पते लिखे थे। आप सब एक बार फिर मिलना चाहते थेअब महादेवन शारिरिक रूप से तो नहीं मिल सकेंगे, पर आत्मिक रूप से अवश्य आपके पास होंगे, ऐसा मैं सोचती हूँयह पत्र इसी आशय से लिख रही हूँ... आपके महादेवन की पुत्री'
मैंने वह पत्र कई बार पढ़ा और अपने आप को रोक नहीं पायामैंने तुरंत सभी तेवीस यात्रियों को पत्र लिखकर महादेवन को श्रद्धांजली अर्पित कीआज मेरे पास महादेवन की पुत्री का और उन तेवीस साथियों के पत्र हैं जिनके नाम-पते एक कागज पर लिखे गये थे। मैं इन्हें जब चाहे तब देखकर महसूस कर सकता हूँ कि फरिश्ते तो किसी एक के होते हैं, पर ईश्वर सबका होता है



यह कहानी भूपेंद्र कुमार दवे जी द्वारा लिखी गयी है आप मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल से सम्बद्ध रहे हैं आपकी कुछ कहानियाँ व कवितायें आकाशवाणी से भी प्रसारित हो चुकी है 'बंद दरवाजे और अन्य कहानियाँ''बूंद- बूंद आँसू' आदि आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैसंपर्क सूत्र - भूपेन्द्र कुमार दवे,  43, सहकार नगररामपुर,जबलपुरम.प्र। मोबाइल न.  09893060419.

COMMENTS

LEAVE A REPLY: 4
  1. विमान उड़ान में विलंब हाेना किस भाँंति सुखद हाे गया यह कहानी में बहुत ही खुबसूरती से बताया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. जीने के इस ज़ज्बे और महादेवन जी की सोच को सलाम...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मैं आभारी हूं कि आपने रचना पर विचार अभिव्यक्त कर मुझे उत्साहित किया

      हटाएं
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

Advertisements

आपको ये भी रोचक लगेगा

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,58,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,10,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,177,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,682,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,1,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,34,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,85,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,8,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,21,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,19,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,138,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,65,प्रेमचंद,22,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,76,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,115,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,59,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,13,राजभाषा हिंदी,47,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,18,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,72,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,21,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,4,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,11,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,9,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,18,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,13,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,17,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,9,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,164,हिंदी लेख,312,हिंदी समाचार,69,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,5,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,31,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,50,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,8,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,57,Beauty Tips Hindi,3,English Grammar in Hindi,3,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,9,hindi essay,156,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,54,hindi stories,457,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,Notifications,5,question paper,10,quizzes,8,Shayari In Hindi,12,sponsored news,2,Syllabus,7,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,15,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: अनमोल क्षण (हिंदी कहानी)
अनमोल क्षण (हिंदी कहानी)
एक शरारती बच्चे की तरह ठंड़ गुदगुदाने के लिये छाँक-छाँककर जगह ढुँढ़ रही थी।
http://2.bp.blogspot.com/-N7tPWxGZfFU/T63r6ytcMmI/AAAAAAAAEcQ/WAyw1L-_lR8/s1600/bhupendrakumardave.jpg
http://2.bp.blogspot.com/-N7tPWxGZfFU/T63r6ytcMmI/AAAAAAAAEcQ/WAyw1L-_lR8/s72-c/bhupendrakumardave.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2015/01/precious-moments-of-life.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2015/01/precious-moments-of-life.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content