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मजबूत हाथ सबसे सुरक्षित हाथ नहीं होते!



संसार में मजबूत हाथ का अपना इतिहास है
जैसे मजबूत हाथ थे महाबली रावण के
कैलाश पर्वत को उखाड़ने की शक्ति थी उसकी भुजाओं में और
शिव का दिया एक खड्ग भी था उसके हाथ में।
तो हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र के हाथों में
हजार हाथियों का बल था
और उनके दुलारे पुत्र दुर्योधन और दुशासन भी
बाहुबली थे।
और सम्राट सहसबाहु के पास तो थे हजार हाथ
शक्ति से भरे मजबूत हाथ
युद्ध के लिए हर पल बेचैन रहने वाले हाथ
और वाणासुर के पास भी थे हजारों मजबूत हाथ ।
लेकिन इन सब मजबूत हाथों ने क्या किया
जानती है दुनिया।
बोधिसत्व
बोधिसत्व
धृतराष्ट्र के हाथों का बल अंधा था
पुत्रों के अतिरिक्त
सूझता ही नहीं था किसी और का हित
किसी और का हक
किसी और का सुख
वह चीर हरण को भी स्वीकार करता रहा
और पूरी शक्ति लगाई
भीम को चकनाचूर करने के लिए।
हाथ का बल जब अंधा हो जाए तो
वह केवल संहार की पीठ सहलाता है
मजबूत हाथ वाला धृतराष्ट्र
घर की बहू को अपनी जंघा पर बैठाने की बात
करने वाले दुर्योधन की
मजबूत भुजाएं नहीं उखाड़ता
बल्कि उसकी रक्षा करता है
वह चीर हरण करने वाले दुशासन की छाती नहीं फाड़ता बल्कि उसके लिए छाया बनता है।
देख लो इतिहास
हाथ जब बेहद मजबूत हो जाते हैं तो वे
कभी सीता को उठाते हैं
तो कभी वेदवती को
कभी अपनी ही बधू रम्भा को घेर लेते हैं सबल हाथ
ऐसे हाथ नहीं सुनते किसी की
वे अपनी लंका जलाते हैं
अपनी दुनिया बरबाद करते हैं खुद।
वे दो से बीस हो जाते हैं
और हर एक हाथ से करते हैं बस अत्याचार
बूढ़ा जटायु भी उनके लिए काटे जाने का दुख झेलता है।
मजबूत हाथ में अपना हाथ देना
एक खतरा रहा है कभी भी
बच्चों को माएं बेहद कोमल हाथों से रचती हैं
कृष्ण ने बेहद मजबूत हाथ वाले
दुर्योधन का साथ नहीं दिया कभी भी।
इतिहास में हर मजबूत हाथ
अंत तक फांसी के फंदे में बदल जाता है
या बेड़ी हथकड़ी में
सभी मजबूत हाथ
अंत तक हथियार में बदल जाते हैं।
वे ऐसे पकड़ लेते हैं सब कुछ
जैसे वे जकड़ने के लिए ही बनाए गए हों
वे सिर्फ अपनी सोचते हैं
अपनी दहाड़ अपनी चिंघाड़ अपनी जैकार
अपनी पीठ थपकाते
पकड़ ढीली न हो जाए इस सोच में वे सब कुछ तोड़ते जाते हैं
सब कुछ नष्ट करो
अपनी जकड़ बनाए रखने के लिए।
इतिहास कहता है वर्तमान से
सुनो मजबूत हाथ का किस्सा
कभी न बनो मजबूत हाथ का हिस्सा
बचो मजबूत हाथ से बचो
बचो बाहुबल से और
तलाश करो हजारो करोड़ो
कमजोर और दुर्बल हाथों को
और उनसे कहो कि वे एक बांसुरी बनाएँ
या एक घड़ा या एक दीया या एक
छोटा सा पालना
एक गोल सी रोटी लकड़ी या पत्थर के चौके बेलने से बनी रोटी
एक गोल टोपी
हजारों छोटे-छोटे धागों और
सुइयों की संगत से बुनी टोपी
एक पगड़ी मुरैठे वाली तगड़ी पगड़ी।
आपने किसी मजबूत हाथ को जूता बनाते पाया है
किसी शक्तिशाली हाथ को
पेंसिल छीलते सितार के तार साधते
किसी सुंदरी की वेणी में फीता बांधते पाया है?
यह सब करने में मजबूत नहीं बेहद कोमल हाथों की जरूरत होती है
जबकि मजबूत हाथ तोड़ते हैं वे जोड़ते नहीं अक्सर।
लकड़ी से बल्ला बनाने के लिए
और रुई से धागा कातने के लिए
और बटन टांकने के लिए और पोलियो की दवा पिलाने के लिए
माथे पर तिलक और आँखों में काजल लगाने के लिए
और कंघी करने के लिए
लट सुलझाने के लिए
आंसू पोछने के लिए
मजबूत नहीं कमजोर हाथों की जरूरत होती है।
मजबूत हाथों से बचो
मजबूत हाथ कभी साथ नहीं देते कमजोर हाथों का।
याद करो माँ के वे हाथ जो न होते थोड़े कमजोर और स्नेह भरे
याद करो पिता के हाथ
याद करो उन कारीगरों के हाथ जो
अगर वे अंधी शक्ति रखते और उन हाथों में
एक कलाकार का विनय न होता शामिल
तो वे जीवन भर केवल पहाड़ तोड़ने का काम करते
वे कभी न बना पाते एक मूर्ति
एक चट्टान को संवारने में
मजबूत नहीं कोमल और लगन वाले हाथों की जरूरत होती है।
याद हैं हिटलर के हाथ
याद है गोडसे के हाथ
याद है संसार को सुरक्षित रखने के नाम पर फांसी का फंदा बन गए हाथ
कमजोर को छीलने के लिए रंदा बन गए हाथ!
अगर करना चाहते हो कुछ तो मजबूत हाथों को
अपनी दुनिया से थोड़ा दूर कर दो
अगर कर पाओ तो
संसार के ताकतवर हाथ को
एक गौरैया के डैने जैसा मुलायम और हल्का कर दो।
फिर मजबूत हाथ प्रार्थना में
जुड़ जाएँगे
या वे खुद को गोली मार लेंगे या
फूलों की क्यारी सजाएँगे!
बच्चों के लिए झुन झुना बनाएंगे!



- बोधिसत्व, मुंबई

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