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वीरों की जयकार कर
पुलवामा में शहीद वीरों को समर्पित



आज लहू केसर बन जाये, 
     दुश्मन को ललकार कर। 
आज उठा बंदूक हे भारत, 
वीरों की जयकार
वीरों की जयकार
      वीरों की जयकार कर। 

नमकहरामों की बस्ती में,
        सांप सपोले रहते हैं। 
केसर की सुंदर क्यारी में, 
       बम के गोले बोते हैं। 

राजनीति के गलियारों में, 
      गद्दारों की फौज खड़ी। 
जब भी आतंकी को मारो, 
      इनको होती पीर बड़ी। 

जिन हाथों में पुस्तक होती, 
    उन में पत्थर आज थमाए हैं। 
फूलों की क्यारी में किसने, 
          बम बारूद लगाए हैं। 

संविधान की सीमाओं को,
      किसने आज चुनौती दी? 
भारत के टुकड़े करने की, 
     किसने आज मनौती की ?

आतंकों के मंसूबों को, 
   किसने आज फ़िज़ा दे दी। 
गुलशन के गलियारों को, 
    किसने आज खिज़ा दे दी। 

पैंसठ और इकहत्तर में, 
    जिसने मुँह की खाई थी। 
हाथ उठा कर दोनों जिसने, 
     मुँह कालिख पुतवाई थी। 

कश्मीरी काँधे पर रख, 
       वह बन्दूक चलाता है। 
उन्मादी जेहाद चला कर,
     युवकों को फुसलाता है। 

भारत के अंदर भी जो, 
          गद्दारों की टोली है। 
खा करके भारत की रोटी, 
     पाक की वो हमजोली है। 

दिल्ली की गद्दी पर बैठे, 
         सब ये सत्ताधीश सुनें  
या तो पाक को सबक सिखायें
         या फिर वन सन्यास चुनें।

नहीं खून गर अब खौला तो, 
            खून नहीं वह पानी है। 
अगर देश के काम न आये, 
           वह बदजात जवानी है। 

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,  
        आज कहाँ मुँह धोती है। 
भारत माता की हर सिसकी, 
        जन जन में अब रोती है। 

आग उगलती हैं अब आँखें,
       मन में अब प्रतिशोध बहे।
खून का बदला खून से लेना,
          भारत ये समवेत कहे।

वीर शहीदों की कुर्बानी,
          यूँ न खाली जाएगी।
रावल से लाहौर तलक,
   अब मौत निराली जाएगी।

गिन गिन कर हम बदला लेंगें,
             भारत में स्वर एक कहे।
आज शपथ है इस भारत को,
              अब न ये आतंक सहे।

पूरा भारत देश दे रहा,
     नम आंखों से आज विदाई।
वीर शहीदों को प्रणाम,
    रोक न सकोगे आज रुलाई।

फुलवामा की धरती में, 
     जिन वीरों का खून जला।  
उनकी माँ को नमन करें हम, 
    जिनको ये बलिदान मिला।


-सुशील शर्मा

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