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प्रेम के रास्ते


प्रेम के रास्ते कभी सपाट नही होते,
उन्हें गुजरना ही पड़ता है
दुर्गम घाटियों से होकर,
प्रेम के रास्ते
प्रेम के रास्ते
सीधे-सपाट रास्तों से होकर
बहने वाला प्रेम      
सूख जाता है
उथले जल की तरह
सागर तक पहुंचने से
पहले ही ,,
प्रेम के रास्ते तो रेगिस्तानी
नदियों जैसे होते हैं,,
टेढ़े-मेढ़े
ऊबड़-खाबड़
चलते-चलते मुड़ जाते हैं
अचानक ही
नागफनी की झाड़ियों में ,,
प्रेम को बहने के लिए
चुनने ही होंगे ये रास्ते।।
खैर !
जो भी हो
प्रेम नदी के रास्तों में
आने वाले घाटियाँ-पठार
थोड़ी और बढ़ा देते हैं
इस नदी की गहराई
और प्रेम का प्रवाह ।।


- मीनाक्षी वशिष्ठ

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