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फूल


फूल किस पेड़ से उपजा है कौन पूछता है
पूछो बस इतना कि कौन सा
फूल कितने दिन किस रंग में 
कितनी खुशबू  देता है
फूल
फूल
पेड़ किस काम आएगा काट के किसी दिन
किसी लाश  के साथ जला दिया जायेगा
फूल जब तक खिला है रंगीन है खुशबू देता है
हमेशा  पूछा और पूजा जाता है
फूल को याद है पेड़
और पेड़ भी चाहता है फूलों को
पर ये भी सच है कि दोनों का साथ रहना 
नियती नहीं है
कोई तोड़ लेता है
कोई टूट जाता है और कोई
मुरझा के नीचे गिर किसी के पैरों तले
कुचला जाता है

फूलों के अलग रंग होते हैं
अलग खुशबू होती है और 
और अलग आकार होता है
पर इंसान हर फूल की खासियत
एक फूल में संजोकर
अपने घर में सजाना चाहता है
फूलों ने भी किसी हद तक 
समझौता कर लिया है
एक फूल कई रंगों में पैदा होने लगता है
खुशबू भी बदलने की कोशिश  करता है
आकार भी थोड़ा बहुत बदल लेता है
पर पूर्ण होना तो संभव नहीं
तो दो-चार दिन साख पाकर मुस्कराता है
मुरझाते ही किसी डिब्बे या तालाब में
फेंका जाता है
तब फूल को पेड़ बहुत याद आता है
काश ! फूल फिर पेड़ जा लगता 
ये पेड़ भी सोचता है और फूल भी। 
          





संध्या रियाज़ - प्रसिद्ध फिल्म निर्देषक मुजफफ्र अली की फिल्मों,धारावाहिकों और टेलीफिल्मों में लेखन और निर्देषन के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी।सहारा वन चैनल में एक्सक्यूटिव प्रोड्यूसर और कलर्स,सहारा वन इमेजिन आदि में प्रसारित अनेकों धारावाहिकों की क्रियेटिव हेड रहीं.सम्प्रति :-मुम्बई में क्रियेटिव आई लिमिटेड के फिल्म एवं टेलीविजन विभाग में आइडियेषन हेड के पद पर कार्यरत। 

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