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मानव धर्म


मन्दिर निर्माण का कार्य चल रहा था। कार्य लंबे समय से चल रहा था। मज़दूर बेचारा अपने परिवार के पालन
मानव धर्म
पोषण के लिए अपनी पत्नी को भी मंदिर निर्माण कार्य में मजदूरी के लिए अपने साथ में ले जाता था। दोनों पति पत्नी मन्दिर की नींव से कगार तक सारा कार्य दिल लगाकर करते हैं।करते भी क्यों नही ।कोई अमीर लोग तो मजदूरी पर आते नहीं ।वे तो जब मन्दिर बन जाता है तब दर्शन करने आते हैं तब भी वातानुकूलित गाड़ी में बैठकर आते हैं क्योंकि ज्यादा गर्मी सर्दी वे सहन नहीं कर सकते । अब तो भगवान भी उनका हो जाता है । क्योंकि वे ठहरे धन दौलत वाले , फिर मन्दिर के नियम भी उन्हें ही बनाने हैं।

एक बूढ़ी असहाय औरत मन्दिर के सामने खड़ी है, उसे मन्दिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है। क्योंकि उस मंदिर में महिलाओं को अंदर जाने की अनुमति नहीं है। 

वह वही औरत थी जिसके दिन रात की मेहनत के पसीने से उस मंदिर का एक एक पत्थर भीगा था। आज उसी महिला के प्रवेश मात्र से वह मन्दिर अपवित्र हो जाता है । 

वाह रे धर्म के ठेकेदारों ।धर्म के पुजारियों।

इंसान का कोई जाति, धर्म नहीं है ।असलियत में इंसान का केवल एक ही धर्म है-" मानव धर्म"


-अशोक कुमार ढोरिया

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  1. सबरीमाला के अतिरिक्त किसी ऐसे मंदिर का नाम बताइये जहाँ महिलाओं का प्रवेश मना हो ?

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