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निःस्वार्थ भावना


रामसिंह एक शिक्षक था। शिक्षण के साथ साथ उसे पौधे लगाने का बहुत शौक था।जहाँ भी उसे कोई खाली जगह
पौधा
दिखाई देती ,कोई न कोई पौधा रोप देता था .पाठशाला को उसने हरा भरा बना दिया था।

एक दिन एक बच्चे ने शिक्षक से पूछा-गुरु जी आप इतनी रुचि लेकर पौधे लगाते हैं। इसके बदले आपको क्या मिलेगा।आप किसी दूसरी जगह बदली होकर चले जाएंगे। आप न तो इनकी छाया में बैठ पाएंगे और न इनके फल खा पाएंगे।

शिक्षक ने बच्चे को समझाते हुए कहा-बेटा हमें हर कोई कार्य अपने स्वार्थ के लिए नहीं करना चाहिए।ये पौधे हमारे पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने में हमारी मदद करते हैं। चाहे हम कहीं भी हों ,पौधे शुद्ध ऑक्सीजन देकर हमें लम्बा जीवन देने में भरपूर योगदान देते हैं।  पौधे वर्षा लाने में सहायक हैं। प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हैं।

यह सुनकर सभी बच्चों ने उसी दिन से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने का प्रण लिया ।सब बच्चों ने गुरु  जी के उपदेश को मानते हुए कसम खाई कि आज से हर बच्चा हर वर्ष  कम से कम पाँच पौधे अवश्य लगाएगा।




अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा

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