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दूसरों में बुराई नहीं बल्कि अच्छाई देखनी चाहिए
We should not see evil but goodness



दूसरों में बुराई नहीं बल्कि अच्छाई देखनी चाहिए We should not see evil but goodness - बहुत समय पहले की बात है .एक बार एक राज्य के राजा ने एक चोर को फाँसी की सजा सुना दी .चोर होशियार था .उसने राजा को अपनी बातों में फँसा लिया .चोर ने कहा - महाराज ! मैं सोने की खेती करना चाहता हूँ .अगर आप मुझे कुछ समय दें तो मैं सोने की बुवाई कर दूँ .राजा लाचाच में पड़ गया .उसने सोने की खेती के लिए एक खेत तैयार कराया .अब बोने का समय आया तो चोर ने कहा - बीज शुद्ध होना चाहिए और बीज बोने वाला ऐसा आदमी हो ,जिसने जिंदगी में कभी चोरी न की हो .ऐसे व्यक्ति की खोज शुरू हुई . 

राजा ने एक आदमी को बुलाया तो उसने कहा - मैंने बचपन में कई बार चोरियाँ की थी . इस तरह कई लोगों को
अच्छा - बुरा
अच्छा - बुरा 
बुलाया गया किन्तु उनमें से एक भी आदमी ईमानदार नहीं निकला.सबसे कोई न कोई छोटी या बड़ी चोरी की थी .अब राजा ने अपने मंत्री को बुलाया .मंत्री ने कहा - महाराज ! जाने - अनजाने कभी - न - कभी कोई चोरी हो ही जाती है .मंत्री के बाद राजा का नंबर आया कि राजा ईमानदार है क्यों न वे ही बीज डालें .तब राजा ने अपनी सफाई देते हुए कहा - मैं बचपन में मिठाई चुराकर खा लिया करता था .सारे राज्य में घोषणा कर दी गई कि जो आदमी कभी न चोरी किया हो ,वह राजदरबार में हाज़िर हो .इस तरह एक भी आदमी राजदरबार में नहीं आया .
चोर बहुत चतुर था .वह राजा के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हुआ और बोला - महाराज ! आपके राज्य में जब सभी चोर हैं ,एक भी आदमी ईमानदार नहीं हैं तो मुझे ही फाँसी की सजा क्यों दी जा रही है ? राजा उसकी बात से राजी हो गया और उसे माफ़ कर दिया . 

निति कहती है कि दूसरे की गलती सब लोग निकालते हैं ,अपनी गलती की ओर कोई भी ध्यान नहीं देता .दुनिया में गलती किस्से नहीं होती .हर आदमी अपने को पाक - साफ़ मानता है और दूसरे को चोर मानता है और उसकी निंदा करता है .कोई चोरी करते पकड़ा जाता है तो सब लोग उसे मारने - पीटने के लिए दौड़ते हैं ,कोई अपना दामन नहीं देखता है कि वह खुद कितना गन्दा और गुनाहगार है .आज हर आदमी घूसखोरी की टाक में रहता है .इसे उपरी कमाई कहा जाता है .हर आदमी झपट्टा मारने की ताक ने रहता है .हर आदमी अगर ईमानदारी से काम करें तो चोरी और बेईमानी तथा घूसखोरी और भष्ट्राचार की ख़त्म हो जाए .सब अपनी बुराई खोजे तो बुराई का नामोनिशान ही मिट जाए . 

इसीलिए कबीरदास जी ने कहा है कि - 

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, 
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

अर्थ - जब मैंने  इन संसार में बुराई को खोजा  तब मुझे कोई बुरा नहीं मिला जब मैंने खुद का विचार किया तो मुझसे बड़ा कोई बुरा आदमी नहीं मिला . दूसरों  में अच्छा बुरा देखने वाला व्यक्ति सदैव खुद को नहीं जानता . जो दूसरों में बुराई ढूंढते है वास्तव में वही सबसे बड़ी बुराई है .अतः आत्म सुधार करना चाहिए . 

कहानी से शिक्षा - 
  • हमें चोरी नहीं करना चाहिए . 
  • दूसरों में बुराई नहीं बल्कि अच्छाई खोजनी चाहिए . 

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