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अत्याचारी राजा 
Atyachari Raja


एक राजा था .वह बड़ा अत्याचारी था. आये दिन वह निर्दोष अपराधियों को कड़ी सजा देता था और खजाने का सारा पैसा अपनी विलासिता में खर्च कर देता था .जब आधा खजाना खाली हो जाता था तब वह प्रजा के ऊपर अन्याय करता तथा कर लगाता कर लगाकर पैसा वसूल करता था .राजा के अत्याचार से प्रजा बहुत दुखी थी . 

अत्याचारी राजा
उनकी समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि क्या किया जाय ? चापलूस लोग भी राजा के घेरे में लगे रहते थे .अतः उस गाँव के लोग राजा से नहीं मिल पाते थे .अतः उस गाँव के लोगों ने एक दिन बैठक की उस बैठक में सोचा गया कि राजा को किस तरह नष्ट किया जाए .सोचते - सोचते एक चालाक आदमी ने योजना बनायीं .वह बहुत गरीब था . 

योजना यह थी कि मैं सारी रात पानी में रह सकता हूँ पर शर्त है कि अगर मैं पानी में रहूँगा तो राजा को भी पानी में एक रात रहना होगा .राजा यह शर्त मान गया .राजा ने सोचा कि जब ये गरीब व्यक्ति सारी रात पानी में रह सकता है तो मैं क्यों नहीं रह पाऊँगा .उसके पास तो कपड़े भी कम होंगे . 

मैं उससे मोटा कपड़ा पहनकर पानी में जाऊँगा ठण्ड का महिना है .वह मर जाएगा मैं बच जाऊँगा .अगले दिन राजा ने नदी में उसे रात भर रहने को कहा .वह राजा अपने सैनिकों को नदी के किराने लगाये हुए था .जिससे वह रात में बाहर न निकले . 

वह गरीब आदमी नदी के भीतर तैरता हुआ उस पार निकल गया .उस पार उसके दोस्त चारपाई बिस्तर लिए हुए खड़े थे .वह गरीब आदमी रात भर सोया और सुबह उठकर नदी में घुस गया और इस पार निकल आया .राजा उसे देखकर चकित रह गया कि यह मरा नहीं .अब मुझे भी नदी में घुसना पड़ेगा . 

शाम हुई उस गाँव के लोगों ने राजा से आग्रह किया कि आप पानी में घुसे राजा तैयार होकर चल दिया .वे बहुत कपड़े पहने हुए था .नदी में राजा घुसे और गाँव के लोग नदी के दोनों ओर देखभाल में लग गए कि राजा निकल न पाए .कुछ देर तक राजा घुसे रहे .उनके प्राण निकल रहे थे .सुबह हुई दिन निकला .राजा नहीं निकले प्रजा नदी में घुसकर देखने लगी तो राजा की लाश मिली .प्रजा बहुत खुश हुई और एक योग्य व्यक्ति को राजा बना दिया . 



कहानी से शिक्षा - 
  • जनता में एकता होनी चाहिए . 
  • अत्याचारी राजा को प्रजा द्वारा हटा दिया जाना चाहिए . 

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