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हिंदी दिवस का महत्व

हिंदी भाषा किसी परिचय की मोहताज नही है,हिंदी वर्षो से हमारे देश में बोली जाती रही है।  हमारे देश क्या अन्य कई देशों में भी हिंदी भाषा बोली जाती है,मॉरीशस ,पाकिस्तान नेपाल बंग्लादेश सूरीनाम इत्यादि में भी हिंदी अपना विशेष महत्व रखती है।
हिंदी दिवस
हिंदी दिवस एक माध्यम हैं इस बात से अवगत कराने का कि भारत की मातृभाषा हिंदी हैं,१९४९ को हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा घोषित किया गया।भारतीय सविधान भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में 14 सितम्बर 1953  हिंदी दिवस को मातृभाषा के रूप में पहचान मिली।
भारतीय संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी हैं।हिंदी दिवस पर कई अवार्ड भी दिए जाते हैं,  हिंदी दिवस पर दिए जाने वालेे विशेष अवार्ड में राजभाषा गौरव पुरस्कर और राजभाषा कीर्ति पुरस्कर सम्मलित हैं।
हमारे देश में न केवल हिंदी अपितु कई भाषाएं बोली जाती है, किन्तु जितनी सवेदनशीलता हिंदी भाषा में हैं शायद ही और किसी भाषा में होगी।जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र अथवा प्रान्त होगा जहाँ हिंदी भाषा का प्रयोग न हो।

हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है ? 

विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओ में से एक हैं,भाषा विदो के अनुसार हिंदी को चार शैलियों में बांटा गया है,हिंदी भाषा में अधिकांशत: संस्कृत के तत्सम शब्दो का प्रयोग होता है।ये तो हिंदी भाषा का एक सक्षिप्त प्रारूप है,इसके अतिरिक्त हिदी भाषा भाषा का वो माध्यम है जो अपनी बात सरलता से व्यक्त कर सकता है।आज के आधुनिक शैक्षिक दौर में हिदी भाषा जैसे लुप्त सी होती जा रही है,
इंग्लिश मीडियम स्कुल और कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी हिंदी ठीक से पढ़ भी नही पाते है,उन्हें हिंदी से ज्यादा इंग्लिश में सरलता अनुभव होती है।जबकि हिंदी भाषा हमारा राष्ट्रिय भाषा ही नही राष्ट्रिय गौरव भी हैं।ऐसी परिस्थितियों में अनिवार्य है कि हम हिंदी भाषा को उजागर ही रखे न कि इसे लुप्त होने की कगार पर छोड़ दे।

हिंदी दिवस संदेश

हिंदी दिवस इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,दूसरी भाषाओं को सीखना गलत नही है,किन्तु दूसरी भाषाओं को सीखते सीखते अपनी मातृभाषा को अनदेखा कर देना भी न्याय संगत नही है।विश्व की उन्नत भाषाओ में हिंदी भाषा सबसे ज्यादा व्यवस्थित भाषा है सरल शब्दों में कहा जाये तो हम जो लिखते है वही बोलते है और उसका अर्थ भी वही होता है जबकि अन्य भाषाओं में ऐसा नही होता, वहाँ बोला कुछ और जाता है और अर्थ कई बार भिन्न ही होता है।

"निज भाषा उन्नति अहैं, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के,मिटत न हिय को शूल।।
विविध कला शिक्षा अमित,ज्ञान अनेक प्रकार।
 सब देसन से लै करहु,  भाषा माहि प्रचार।।

अथार्त अपनी मूल भाषा से ही उन्नति संभव है,क्योंकि हमारी मूल भाषा ही सब उन्नति का मूलाधार हैं।और मातृभाषा के ज्ञान के बिना ह्रदय की पीड़ा का निवारण भी संभव नही है,हमे सभी देशों से विभिन्न प्रकार असीमित कलाएं एवं ज्ञान अवश्य लेना चाहिए किन्तु उसका प्रचार अपनी मातृभाषा में ही करना चाहिए।  
ऐसे समय में जब सारी दुनिया की निगाहें भारत की और लगी है ऐसी परिस्थिति में भारत के विकास के साथ साथ हिंदी  भाषा का महत्व बढ़ना भी निश्चित है।

- रूबी श्रीमाली 

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