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जिंदगी

जिंदगी
जिंदगी
सुख-दुःख की परिभाषा है जिंदगी।
कभा आशा तो कभी निराशा है जिंदगी।
ईश्वर का वरदान है जिंदगी।
प्रकृति का उपहार है जिंदगी।
कभी धूप कभी छाँव है जिंदगी।
उम्मीदों पर चलते रहना है जिंदगी।
सुलझ गयी तो सुंदर सपना है जिंदगी।
उलझ जाये तो तमाशा है जिंदगी।
सफलताओं का सुख है जिंदगी।
तो असफलताओं का दुःख भी है जिंदगी।
हर कदम एक नयी जंग है जिंदगी।
जीत जायें जंग तो अच्छी लगती है जिंदगी।
अपने लिये तो सभी जीते हैं जिंदगी।
दूसरों के लिये जीने का नाम है जिंदगी।
इंसान को पता नहीं क्यों इतनी प्यारी है जिंदगी।
इंसान के अंतिम समय में साथ छोड जाती है जिंदगी।




यह रचना विशाल गर्ग जी द्वारा लिखी गयी है.आप खुर्जा, उत्तर प्रदेश से हैं .आपने एम् .कॉम तथा बी.एड तक शिक्षा प्राप्त की है तथा शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं .

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