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सारा आकाश उपन्यास में ठाकुर साहब 

समर के पिता ठाकुर साहब एक सह - पात्र के रूप में उपन्यास में आते हैं . ये भी मध्यवर्गीय पात्र का प्रतिनिधित्व करते हैं . वह  स्वभाव से चिड़चिडे हैं . वास्तव में सिमित आय ,अत्यधिक खर्च ,संयुक्त और बड़े परिवार की जिम्मेदारी ने ठाकुर साहब को चिडचिडा बना दिया है . ऐसी हालत में वह समर से आशा करते हैं कि वह नौकरी करके परिवार का बोझ को कम करे . वह चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य उनके निर्देशन और नियंत्रण में चले .वह आज्ञाकारिता को ही अनुशासन मानते हैं . वह यह भी मानते हैं कि लड़कों की समायी पर केवल उनका ही अधिकार है . समर परोक्ष रूप से इसका विरोध करता है . अंत में इसका भयंकर परिणाम सामने आता है . 

ठाकुर साहब में सामाजिक प्रतिष्ठा का मोह है . इसी कारण पुत्री मुन्नी का विवाह करते समय अपनी शक्ति से बाहर आकर खर्च करते हैं और उन्हें क़र्ज़ भी लेना पड़ता है . समर के विवाह में इसी कारण वे दहेज़ का लोभ करते हैं . इनमे भावुकता का भी अभाव नहीं है . मुन्नी की विदाई के समय वह फूट - फूट कर रोते हैं . वह समाज भीरु है . इसी कारण पर्दा प्रथा के समर्थक हैं .संक्षेप में ठाकुर साहब संस्कारवादी ,पुराने विचारों के आग्रही ,चिडचिडे ,दहेज़ लोभी पिता के प्रतीक हैं . 

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