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चुनाव और होली पर दोहे


होली ऐसी बावरी सबको रंगती जाय।
होली
हरे नीले आहें भरे केसरिया मुस्काय।

एक ह्रदय मुस्कान है एक ह्रदय में आह
कुछ आँखे रोती मिली कुछ के मन मे दाह।

जनता जाए भाड़ में कुर्सी चिपके आप।
लोकतंत्र के यज्ञ में जल गए सारे पाप।

जिसके जैसे काम थे वैसे है परिणाम
जनता ने कर दिया सब का काम तमाम।

कुर्सी जाती देख कर नेता जी अब रोय।
 इस होली में सभी मन के मैल को धोय।





होली पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं
*सुशील शर्मा*

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