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बाबूजी 

बाबूजी
बाबूजी
बाबूजी बीमार पड़े थे। सुधीर ने ऑफिस से आते ही बाबूजी के पैर छूए। “बड़ा संस्कारी बेटा है”, कहते हुए बाबूजी आशीर्वाद देने हेतु उद्यत हुए। सुधीर ने सहारा देकर उन्हें बैठाया। तब तक बहु खाना परोस चुकी थी। सुधीर ने अपने हाथों से बाबूजी को खाना खिलाया। फिर दवा देकर पाँव दबाने लगा। और एकदम से आई तेज हवा से खिड़कियां बज उठी। 

        ..............अकस्मात बाबूजी की नींद खुली। स्वप्न टूट चुका था। सुधीर तीन साल पहले उन्हें यहां छोड़ गया था। बाबूजी चीख उठे,”कहाँ हो सुधीर बेटा?” 
वृद्धाश्रम की दीवारें खामोश थी।



रचनाकार परिचय = साहित्य जगत में नव प्रवेश।  पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी,  कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि  में रचनाएं प्रकाशित। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत।
संपर्क सूत्र - विनोद कुमार दवे,206 बड़ी ब्रह्मपुरी मुकाम, पोस्ट=भाटून्द ,तहसील =बाली ,जिला= पाली
 राजस्थान.306707.मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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