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आकाशगंगा

आज वृंदा बहुत खुश थी क्योंकि उसकी ममेरी बहन सुमन जो आ रहीं थी ।सुमन दस जमात तक पढ़ी है और  अब आगे की पढ़ाई के लिए उसे शहर जाना पड़ता क्योंकि उनके गाँव मे दस जमात से आगे स्कूल है ही नहीं ।इसलिए उसे उसकी बुआ के गाँव भेज दिया आगे की पढ़ाई के लिए ।वृंदा व सुमन हमउम्र थी और सहेलियों जैसी बहनें, इसलिए वृंदा उसके आने से इतनी खुश थी ।
     
सम्मान के नाम पर हत्या
             सुमन को आए दो दिन हो गए थे और बड़े भैया वृंदा की कक्षा मे उसका भी नाम लिखा आए थे ।अगले हफ्ते से उन्हें स्कूल जाना था ।ये खाली समय वे खेतों मे घूमने मे , झूला झूलने मे , इमली व बेर तोड़ने मे और गप्पें मारने मे ही निकाल देती थी ।वृंदा की माँ भतेरी तो उनके हाॅस - परिहास को देखकर को देखकर खुशी से खिल उठती थी लेकिन वृंदा के बड़े भाई गणेश को अपनी छोटी बहनों का घूमना - फिरना और हँसी ठ्ठटा करना बिल्कुल नहीं भाता था ।इसलिए वो दोनों गणेश से डरती थी ।
                        एक सप्ताह बाद दोनों स्कूल जाने लगी ।स्कूल जाने के रास्ते मे एक जंगल पड़ता था ।उस जंगल से जहाँ वृंदा की जान सुखती थी , वही सुमन को वह बहुत रोमांचक लगता था ।वह जब - तब एक बार जंगल के रास्ते से चलने को कहती रहती थी लेकिन वृंदा उसे मना कर देती थी ।वह अमावस्या का दिन था जब सुमन ने जिद पकड़ ली कि आज इस कच्ची सड़क से नहीं ब्लकि जंगल मे से जाएंगे ।
वृंदा के बार - बार मना करने पर भी जब वह नहीं मानी तो वृंदा ने कहा - "इस जंगल मे से जाने से पहले तुम्हें इस जंगल की कहानी सुननी पड़ेगी ।
सुमन ने हैरानी से कहा - "इस जंगल की क्या कहानी हो सकती है ?"
वृंदा - " इस जंगल की कहानी तो इतनी पुरानी है कि जब तुम और मैं तो क्या हमारे बाप - दादा भी पैदा नहीं हुए थे ।"
सुमन ने उत्सुकता दिखाते हुए कहा - "इतनी पुरानी कहानी है तो जरूर सुननी चाहिए ।"
वृंदा - जैसे कि मैं पहले ही कह चुकी हूँ कि बात बहुत पुरानी है ।इस गाँव मे लुहारों का एक लड़का था आकाश और ठाकुरों की लड़की थी गंगा ।उन दोनों मे प्रेम हो गया और दोनों छूप - छूप कर मिलने लगे ।ठाकुरों का इस गाँव मे बहुत दबदबा था ।वे कहा बरदाश करने वाले थे कि ठाकुरों की लड़की लुहार के लड़के से प्रेम करे ।आज के वक्त मे भी जब जात - पात का इतना बखेडा है तो वह समय तो बिल्कुल ही अलग था ।
                     फिर गंगा के पिता ने आकाश को गंगा से कभी न मिलने की धमकी दी और गंगा को घर मे कैद कर लिया ।अब उसका आकाश से मिलना मुश्किल हो गया ।एक नौकरानी उसकी निगरानी के लिए तैनात कर दी गई , उस नौकरानी का नाम चांदो था ।वह बहुत लालची औरत थी और ये बात गंगा जानती थी ।इसी का फायदा उठाकर गंगा ने चांदो के हाथ आकाश को एक खत भेजा , उसकी एवज मे चांदो को एक सोने का कंगन मिला ।
            गंगा ने उस खत मे उसी रात आकाश के साथ भागने की बात लिख दी थी ।उसने चांदो को सोने के हार का लालच देकर अपना साथ देने के लिए मना लिया ।रात को जब ठाकुर निश्चिंत होकर सो रहे थे तभी गंगा चांदो की मदद से हवेली से बाहर जाने मे कामयाब हो गई ।
           
पुष्पा सैनी
पुष्पा सैनी
 उधर आकाश और गंगा कहीं दूर भागने वाले थे तो इधर चांदो ने ईनाम के लालच मे सारी बात ठाकुर को बता दी ।ठाकुर यह बात सुनकर तिलमिला उठा ।वह चांदो की मदद से उन्हें पकड़ने मे कामयाब हो गया ।ठाकुर उन दोनों को जंगल मे ले गया और दोनों को एक साथ मौत के घाट उतार दिया ।चांदो ये नजारा देखकर पागल हो गई ।उसने बस इतना सोचा था कि ठाकुर गंगा को वापस ले आएंगे लेकिन अपनी आँखों के सामने आकाश गंगा के कत्ल को वह सहन न कर सकी ।कहते है उन दोनों की आत्मा इसी जंगल मे भटकती है इसलिए सब इस जंगल मे जाने से डरते है ।"
यह कहानी सुनकर सुमन ने कहा -  " तो क्या सच मे इस जंगल मे उनकी आत्मा है ? "
वृंदा - " पहले तो मुझे भी विश्वास नहीं होता था लेकिन जब गाँव के कुछ लोग उनकी आत्मा की शांति के लिए जंगल मे पूजा और हवन के लिए गए तो देखते ही देखते पुजारी की ह्रदयाघात से मौत हो गई ।"
घर पहुँच कर सुमन ने अपनी बुआ से आकाश गंगा की कहानी के बारे मे पूछा तो भतेरी ने कहा - "मैं तो जबसे यहाँ ब्याह कर आई हूँ लोगों के मुँह से यही कहानी सुन रही हूँ लेकिन तुम्हारे फूफा जी कहते थे कि असल कहानी कुछ ओर है ।"
सुमन और वृंदा के मुँह से एकसाथ निकला - " क्या ।"
भतेरी ने कहा - " असली कहानी यही है कि कोई आकाशगंगा थे ही नहीं ।गाँव वालों ने अपने बच्चों को ये कहानी बना कर सुना रखी है ताकि वे न तो आकाशगंगा की तरह प्रेम मे पड़े और न ही घर से भागने की हिमाकत करे ।ये असली कहानी गाँव के चंद बुजुर्गों को छोडकर किसी को नहीं मालूम ।यह बात तुम्हारे फूफा जी ने भी तब सुन ली थी , जब पीपल के नीचे बैठ कर कुछ बुजुर्ग हुक्का गुड़कते हुए बातें कर रहे थे ।उससे पहले हम भी इस कहानी को सच ही समझते थे ।"
सुमन ने कहा - "लेकिन बुआ वह पुजारी जो जंगल मे हवन करने गया था फिर उसकी मौत कैसे हुई ।"
भतेरी ने मुस्कराते हुए कहा - "ये बात तो मेरे सामने की ही है ।गाँव के कुछ लोगों ने आकाशगंगा की आत्मा की शांति के लिए हवन कराने की ठानी क्योंकि उन्हें सच का पता नहीं था ।तुम्हारे फूफा जी ने उन्हें ऐसा करने के लिए मना किया लेकिन वे नहीं माने ।तुम्हारे फूफा जी उन्हें सच भी नहीं बता सकते थे क्योंकि उन्हें गाँव के पंचों का डर था और रही पुजारी के मरने की बात उसे दो बार पहले भी दिल का दौरा पड़ चुका था ।"
वृंदा व सुमन यह बात सुनकर हैरान हो गई ।
भतेरी ने कहा - " बस ऐसे ही पुराने किस्से पीढ़ी दर पीढ़ी चलते जाते है ।कोई उन पर विश्वास कर लेता है तो कोई पूरी तरह से अविश्वास भी नहीं कर पाता ।अलग - अलग गाँव मे बच्चों को पथभ्रष्ट होने से बचाने के लिए न जाने कितने किस्से कहानियाँ स्वयं ही गढ़ दिए जाते हैं ।"
वृंदा ने कहा - " माँ फिर आपने हमें असली कहानी क्यों बता दी ? क्या आपको हमारे पथभ्रष्ट होने का डर नहीं हैं ?"
भतेरी ने वृंदा व सुमन को गले लगाते हुए कहा - " मुझे तुम दोनों पर पूरा विश्वास है और मेरा मानना है कि बच्चों को पथभ्रष्ट होने से बचाने के लिए मनगढंत कहानियों की नहीं अच्छे संस्कारों व ऊँचे विचारों की जरूरत होती है ।"
भतेरी की बात सुनकर वृंदा व सुमन मुस्करा उठी ।

यह रचना पुष्पा सैनी जी द्वारा लिखी गयी है। आपने बी ए किया है व साहित्य मे विशेष रूची है।आपकी कुछ रचनाएँ साप्ताहिक अखबार मे छप चुकी हैं ।

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