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मेरा प्रिय खेल - फुटबॉल

खेल बच्चों को बहुत पसंद है . हमारे विद्यालय में अनेक खेल खेले जाते हैं . इन खेलों में फुटबॉल एवं क्रिकेट अपना प्रमुख स्थान रखते हैं . खेल हमारे जीवन में बहुत ही उपयोगी हैं . हमारी कक्षा के अधिकाँश विद्यार्थी क्रिकेट खेलते हैं ,परन्तु मुझे तो फुटबॉल का खेल बहुत पसंद है . यह खेल बहुत ही जनप्रिय है . इस खेल में प्रारंभ से अंत तक उत्साह बना रहता है . देखने वालों के लिए भी पूरे खेल में उत्सुकता बनी रहती है .

वर्णन :

फुटबॉल का खेल खुले मैदान में खेला जाता है . इस खेल के लिए १०० से १५० गज लम्बे तथा ६० गज से १००
गज तक चौड़े मैदान की अवश्यकता होती है . मैदान के दोनों किनारों पर गोल पोस्ट होता है . यह खेल दो दलों के बीच में खेला जाता है . खेल में दोनों ओर ९-९ या ११ -११ खिलाड़ी होते हैं . इस खेल के निर्णायक को हम रेफरी कहते हैं . यह खेल प्रायः १ -३० घंटे तक होता है . यह खेल होते ही दोनों दल एक दूसरे पर आक्रमण करते हैं और विजय पाने के लिए गोल करना चाहते हैं . रेफ्री का निर्णय दोनों दल मानने के लिए बाध्य होता है . इस खेल में खेलने वाले एवं दर्शक गन दोनों को बहुत आनंद आता है . खेल की जिम्मेदारी सभी खिलाड़ी पर होती है .यह खेल सहयोग से खेला जाता है . यह खेल उस समय बहुत ही रोमांचक हो जाता है जब कि कोई दल गेंद लेकर विपक्षी दल के गोल के पास पहुँच जाता है . दर्शकगण इस रोमांचक दृश्य को देखकर आनंद पाते है .

लाभ :

फुटबॉल खेल खेलने से शरीर के सभी अंगों का विकास होता है . शरीर में फुर्ती आती है . सहयोग एवं अनुशासन की भावना का विकास होता है . कोलकाता में यह खेल बहुत ही प्रसिद्ध है .

उपसंहार :

खेल आनंद के लिए खेला जाता है . आजकल खेलों में भी गुटबंदी चल रही है . यह ठीक नहीं है . हमें खेलों को स्वास्थ्य लाभ ,अनुशासन एवं सहयोग की भावना को लेकर खेलना चाहिए .फुटबॉल एक अंतर्राष्ट्रीय खेल है . इस खेल से उच्च भावना का विकास होता है . सरकार को भी इस खेल के विकास में अपनी दिलचस्पी दिखानी चाहिए . 

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