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आज की शिक्षा
शिक्षा -शिक्षा -शिक्षा ,
                    आज की ये शिक्षा |
     बच्चा तो है , लेकिन बचपन  गया है खो,
     जाता हूँ अतीत में ,करता हूँ याद भोले बचपन को |
             वो मासूम सूरत वो तुतली बातें ,
              मन लुभाती थी वो शरारतें |
जयश्री जाजू 
      लेकिन आज उस बच्चे के चेहरे पर पसरा है मौन ,
      नहीं दिखती मासूमियत भोलेपन को पूछे कौन |
                     बचपन की उम्र में बच्चा ,
                     जैसे हो गया प्रौढ़ लगता |
        कैसी है ये शिक्षा आज की , समाज को लेकर कहाँ जाएगी ,
        नींव है संस्कार समाज की ,  नहीं दिखाई देती अब वहीँ |
                      न बड़ों का लिहाज न छोटो से प्यार ,
                       नैतिकता की तो न पूछो बात |
           गुरु के प्रति नहीं सम्मान ,करते रहते  माता पिता का अपमान ,
          जब चाहा किया खिलवाड़ , जरुरत  के बाद इन्हें कोई नहीं सरोकार |
                           ऐसे गुण ऐसी सोच बालक में क्यों रही पनप,
                            हमें खुद को टटोलना होगा पूछने होंगे खूद से प्रश्न |
                            पूछने होंगे खूद से प्रश्न ,पूछने होंगे खूद से प्रश्न |

यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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