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तांत्रिक साधु

चीखने की आवाज,मैंने इधर- उधर देखा कुछ नहीं घनेरी रात के सिवाय I
   अचानक फिर चीखने आवाज I मैं गंभीरता के साथ चारों तरफ झाड़ियों में देखने लगा I मन बैचेन सा हो रहा था I सन्नाटा शोर मचाता डरावना I 
   मासूम बच्चा भागकर पैर से लिपट गया I अपनी जान बचाने की गुहार लगाने लगा I 
   "मुझे बचालो अंकल "
   "क्या हुआ बेटा ?"
   "वो साधु मुझे मारना चाहता है "
   "क्यों ?"
   "जादू टोना के लिए "
    मैंने निगाहें भरीं साधु को दबोच लिया तथा पुलिश के हवाले कर दिया I बच्चे को उसके माँ बाप के यहाँ भेज दिया I 

यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com , मोबाइल - 9584414669 

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