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ख़लील जिब्रान

एक चतुर कुत्ता एक दिन बिल्लियों के एक झुण्ड के पास से गुजरा।
कुछ और निकट जाने पर उसने देखा कि वे कोई योजना बना रहीं थीं और उसकी ओर से लापरवाह थीं। वह रुक गया।
उसने देखा कि झुण्ड के बीच से एक दीर्घकाय, गम्भीर बिल्ला खड़ा हुआ। उसने उन सब पर नजर डाली और बोला, "भाइयो! दुआ करो। बार-बार दुआ करो। यक़ीन मानो, दुआ करोगे तो चूहों की बारिश जरूर होगी।"
यह सुनकर कुत्ता मन-ही-मन हँसा।
'अरे अन्धे और बेवकूफ़ बिल्लो! शास्त्रों में क्या यह नहीं लिखा है और क्या मै, और मुझसे भी पहले मेरा बाप, यह नहीं जानता कि दुआ के, आस्था के और समर्पण के बदले चूहों की नहीं हड्डियों की बारिश होती है।" यह कहते हुए वह पलट पड़ा।




खलील जिब्रान ,विश्व के प्रसिद्ध व लोकप्रिय चिन्तक हैं . ये अरबी ,फारसी व अंग्रेजी साहित्य के ज्ञाता तथा चित्रकार थे . इनका जन्म 1883 में लेबनान में हुआ था .उन्हें अपने चिंतन के कारण समकालीन पादरियों और अधिकारी वर्ग का कोपभाजन होने से जाति से बहिष्कृत करके देश निकाला तक दे दिया गया था। इनका निधन 1931 में  न्यूयॉर्क में हुआ . इनके साहित्य के प्रशंसक पूरी दुनिया में है .इनकी कहानियों में अंधविश्वासों व आडम्बरों के खिलाफ एक सख्त विरोध मिलता है .  


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