19
Advertisement
कंजूस राजा
चन्द्रपुर का राजा अपने कंजूस स्वभाव के नाम से जाना जाता था। वह मजदूरों से काम करवाता, किसानों से अनाज लेता, सुनारों से आभूषण बनवाता पर पैसा देते वक्त कुछ भी मनगढ़ंत किस्सा बनाकर उन्हें खाली हाथ भिजवा देता। लोग चुप रहते। आखिर राजा से कौन बहस करता। फिर भी राजा के इस आचरण से त्रसित होकर सुनार नकली आभूषण देने लगे और व्यापारी मिलावटी माल व किसान खराब अनाज राजा के पास पहुँचाने लगे। खराब अनाज व मिलावटी चीजों के सेवन से राजा की तबीयत खराब रहने लगी। वह बिस्तर से लग गया। राजा ने मंत्री से कहकर देवशर्मा नामक वैध को बुलवाया। राजा की सेहत का सवाल था, इसलिये देवशर्मा ने महंगी जड़ी-बूटी लेकर दवा बनाई और राजा को दी। राजा की तबीयत एकदम ठीक हो गई।
परन्तु जब वैध को पैसे देने की बात आयी तो राजा ने कहा, ‘ वैधजी, कल सपने में मेरे पिताश्री ने बताया कि तुम्हारे पिता उनके खास वैध थे और उन्होंने खुश होकर तुम्हारे पिता को पेशगी बतौर बहुत सारा पैसा दिया था और कहा था कि वे अपने बेटे को भी वैध बनाये ताकि वह भी उनकी तरह मेरे पिताश्री के बेटे याने मेरी चिकित्सा अच्छे से करे। सो तो तुम कर ही रहे हो और इस काम का पैसा तुम्हारे पिता मेरे पिता से पहले ही पेशगी बतौर ले चुके हैं।’
भूपेन्द्र कुमार दवे
यह सुन देवशर्मा चुप रहा और खाली हाथ घर लौट आया। कुछ दिनों बाद राजा की तबीयत फिर बिगड़ी और देवशर्मा को पुनः बुलवाया गया। देवशर्मा इस समय सतर्क था। उसने राजा से कहा, ‘राजन्! कल ही मुझे सपने में मेरे पिताजी ने बताया कि वे आपके पिताश्री का बहुत सम्मान करते थे। पेशगी बतौर पैसे पाकर मेरे पिताजी ने आपके पिताश्री से कहा, ‘पता नहीं कि मेरा बेटा मेरे जैसा अच्छा वैध बन पावेगा या नहीं। इसलिये हे राजन्, आपने जो पैसे दिये हैं उससे मैने बहुत ही कीमती और बढ़िया बवा बनाई है जिसे आप ले लेंगे तो आपका बेटा कभी बीमार पड़ेगा ही नहीं और बीमार हुआ भी तो अपने आप ठीक हो जावेगा।’
  वह दवा आपके पिताश्री ने ले ली थी। अतः आप निष्चिंत रहें। आप की तबीयत अपने आप ठीक हो जावेगी।’
यह बात सुन राजा की आँखें खुल गयी और उसका कंजूसी रफूचक्कर हो गई।

 यह रचना भूपेंद्र कुमार दवे जी द्वारा लिखी गयी है. आप मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल से सम्बद्ध रहे हैं . आपकी कुछ कहानियाँ व कवितायें आकाशवाणी से भी प्रसारित हो चुकी है . 'बंद दरवाजे और अन्य कहानियाँ' ,'बूंद- बूंद  आँसू' आदि आपकी प्रकाशित कृतियाँ है .

एक टिप्पणी भेजें

  1. - वह कौन था? - अनिल धामा ”यश बादल“

    वह देखने में कैसा लगता था, बताना मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूँ कि वह काफी उदास और परेशान था।

    मैंने इंसान होने के नाते पूछ लिया क्या हुआ? बड़े परेशान दिखाई दे रहे हो। क्या मैं आप की कोई सहायता कर सकता हूँ?

    ‘हाँ, मैं उसके लिए काफी परेशान हूँ। जाने उस पर क्या बीत रही होगी...जाने वो कैसे हाल में होगी...’ उसने एक लम्बी सांस छोड़ते हुए कहा।

    ‘वो..वो कौन?’

    ‘वो जिससे मेरा विवाह होने वाला था। मैं उससे बहुत महौब्बत करता था और वह में मुझे दिलों-जान से चाहती थी।’ वह अपनी लवस्टोरी सुनाए चला जा रहा था और मुझे भी उसकी लवस्टोरी में आनंद आ रहा था।

    ‘उसके बाद क्या हुआ?’ मैं उसकी प्रेम कहानी आगे सुनने को बेचैन था।

    ‘फिर... उसके माता-पिता नहीं माने। लेकिन हम एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। एक दिन सुना कि उसके माता-पिता ने ज़बरदस्ती उसका विवाह दूसरी जगह पक्का कर दिया।’

    ‘फिर?’

    ‘मैंने उससे मिलने के लिए दिन-रात एक कर दिए, लेकिन...’
    ‘लेकिन क्या.....‘ मैंने पूछा।

    ‘लेकिन मैं उससे मिल नहीं पाया।’ उसने गहरी साँस छोडते हुए कहा, ‘और मैंने खुदखुशी कर ली।’

    ‘...खुदखुशी....पर तुम तो....’

    ‘अब मैं जीवित नहीं हूँ।’
    ‘क् क्या..मेरी उत्सुकता डर में तब्दील गई थी।’

    ‘घबराओ मत, मैं तुम्हें किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाऊंगा। बस तुम मेरी ज़रा-सी सहायता कर दो।’

    ‘हाँ बोलो’ मैंने राहत की साँस ली।

    ‘मैं उससे आज भी बहुत-अधिक प्रेम करता हूँ, उसका प्रेम ही मुझे इस रूप में भी यहाँ खींच लाया है। मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि वो ठीक तो है! कहीं मेरे मरने की ख़बर सुनकर उसने भी ....और मेरे माता-पिता... क्या तुम मेरी सहायता करोगे?’

    ‘‘अरे आज इतनी देर तक सो रहा है! उठ चाय-नाश्ता तैयार है।’’ किचिन से मम्मी के तीखे स्वर ने मेरी आंखें खोल दीं।

    ‘ओह, आया मम्मी!’ मुझे उस दूसरी दुनिया के उस प्राणी से अपनी बातचीत अधूरी रह जाने का खेद था। काश! मम्मी ने 10 मिनट बाद जगाया होता तो कम से कम उसे इतना तो बता देता कि - ‘हे भाई, बेवजह टेंशन ले रहे हो। यहाँ सब ठीक ही होंगे. तुम्हारे माता-पिता भी ठीक-ठाक होंगे। और उसने भी तुम्हें भुला दिया होगा। क्योंकि तुम्हें पता होना चाहिए कि शादी के पश्चात औरत का एक तरह से दूसरा जन्म ही होता है। और वैसे भी हम धरती के प्राणी मृत प्राणी को याद नहीं करते हैं, क्योंकि मरे हुओं को याद करना अपशकुन समझते हैं। और भूले से भी अपने या उसके घर न चले जाना। जिनके लिए तुम इतने परेशान और दुःखी हो, वो ‘भूत-भूत’ चिल्लाएंगे तुम्हें देखकर और दूर भागेंगे तुमसे।’

    ‘अरे बेवकूफ, इस धरती के लोग यहीं के लोगों से प्यार निभा लें तो बहुत है! तुम तो बहुत दूर जा चुके हो।’ लेकिन मुझे अफसोस है कि ये सब बातें मैं उसे नहीं कह सका।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. वाह भाई ! सपनोँ की भी अपनी एक अलग दुनियाँ होती है। लेकिन ये दुनियाँ हकीकत की दुनियाँ से अच्छी और निराली होती है।

      हटाएं
  2. - वह कौन था? - अनिल धामा ”यश बादल“

    वह देखने में कैसा लगता था, बताना मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूँ कि वह काफी उदास और परेशान था।

    मैंने इंसान होने के नाते पूछ लिया क्या हुआ? बड़े परेशान दिखाई दे रहे हो। क्या मैं आप की कोई सहायता कर सकता हूँ?

    ‘हाँ, मैं उसके लिए काफी परेशान हूँ। जाने उस पर क्या बीत रही होगी...जाने वो कैसे हाल में होगी...’ उसने एक लम्बी सांस छोड़ते हुए कहा।

    ‘वो..वो कौन?’

    ‘वो जिससे मेरा विवाह होने वाला था। मैं उससे बहुत महौब्बत करता था और वह में मुझे दिलों-जान से चाहती थी।’ वह अपनी लवस्टोरी सुनाए चला जा रहा था और मुझे भी उसकी लवस्टोरी में आनंद आ रहा था।

    ‘उसके बाद क्या हुआ?’ मैं उसकी प्रेम कहानी आगे सुनने को बेचैन था।

    ‘फिर... उसके माता-पिता नहीं माने। लेकिन हम एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। एक दिन सुना कि उसके माता-पिता ने ज़बरदस्ती उसका विवाह दूसरी जगह पक्का कर दिया।’

    ‘फिर?’

    ‘मैंने उससे मिलने के लिए दिन-रात एक कर दिए, लेकिन...’
    ‘लेकिन क्या.....‘ मैंने पूछा।

    ‘लेकिन मैं उससे मिल नहीं पाया।’ उसने गहरी साँस छोडते हुए कहा, ‘और मैंने खुदखुशी कर ली।’

    ‘...खुदखुशी....पर तुम तो....’

    ‘अब मैं जीवित नहीं हूँ।’
    ‘क् क्या..मेरी उत्सुकता डर में तब्दील गई थी।’

    ‘घबराओ मत, मैं तुम्हें किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाऊंगा। बस तुम मेरी ज़रा-सी सहायता कर दो।’

    ‘हाँ बोलो’ मैंने राहत की साँस ली।

    ‘मैं उससे आज भी बहुत-अधिक प्रेम करता हूँ, उसका प्रेम ही मुझे इस रूप में भी यहाँ खींच लाया है। मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि वो ठीक तो है! कहीं मेरे मरने की ख़बर सुनकर उसने भी ....और मेरे माता-पिता... क्या तुम मेरी सहायता करोगे?’

    ‘‘अरे आज इतनी देर तक सो रहा है! उठ चाय-नाश्ता तैयार है।’’ किचिन से मम्मी के तीखे स्वर ने मेरी आंखें खोल दीं।

    ‘ओह, आया मम्मी!’ मुझे उस दूसरी दुनिया के उस प्राणी से अपनी बातचीत अधूरी रह जाने का खेद था। काश! मम्मी ने 10 मिनट बाद जगाया होता तो कम से कम उसे इतना तो बता देता कि - ‘हे भाई, बेवजह टेंशन ले रहे हो। यहाँ सब ठीक ही होंगे. तुम्हारे माता-पिता भी ठीक-ठाक होंगे। और उसने भी तुम्हें भुला दिया होगा। क्योंकि तुम्हें पता होना चाहिए कि शादी के पश्चात औरत का एक तरह से दूसरा जन्म ही होता है। और वैसे भी हम धरती के प्राणी मृत प्राणी को याद नहीं करते हैं, क्योंकि मरे हुओं को याद करना अपशकुन समझते हैं। और भूले से भी अपने या उसके घर न चले जाना। जिनके लिए तुम इतने परेशान और दुःखी हो, वो ‘भूत-भूत’ चिल्लाएंगे तुम्हें देखकर और दूर भागेंगे तुमसे।’

    ‘अरे बेवकूफ, इस धरती के लोग यहीं के लोगों से प्यार निभा लें तो बहुत है! तुम तो बहुत दूर जा चुके हो।’ लेकिन मुझे अफसोस है कि ये सब बातें मैं उसे नहीं कह सका।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ye kahani padkar mujhe apne dada ji ki yad agyi unki bhi har kahani ke ant me saspence hota tha

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top