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भारतेंदु हरिश्चंद्र
प्रिय मित्रों , हिन्दीकुंज में आज भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का बलिया भाषण प्रस्तुत किया जा रहा है जो की उन्होंने 1884 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन बलिया के ददरी मेले में दिया था . इस भाषण को हिंदी नवजागरण का मेनीफेस्टो माना जाता है . इस वक्तव्य को 'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है' निबंध के रूप में भी संकलित किया गया है . भारतेंदु ने इस वक्तव्य में देश की विभिन्न समस्याओं पर वैज्ञानिक ढंग से विचार किया है . आशा है कि आप सभी को यह पसंद आएगा .



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  1. सचमुच भारतेन्दु जी का यह भाषण नवजागरण का बाषण था । ‘यह निबंध मैंने बारहवीं कक्षा में पढ़ा था । बहुत ही शानदार निबंध है । इसके कुछ वाक्यांश आज भी प्रयोग किए जाते हैं जैसे- का चुप साधि रहा बलवाना, भारत के लोग रेलगाड़ी के डिब्बे हैं आदि..

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  2. भारतेन्दु जी का बलिया आना भी ऐतिहासिक तथ्य है । ददरी मेले के उस सांस्क्रतिक मच को आज भी भारतेन्दु मंच के नाम से जाना जात है ।

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