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श्यामसुन्दर दास
डॉ .श्यामसुंदर दास, द्विवेदी युग के महान साहित्यकार ,हिंदी को गौरव शिखर पर प्रतिष्ठित करने वाले ,गद्य निर्माताओं में  एक प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते है .वे हिंदी की उन महान प्रतिभाओं में से है,जिन्होंने भावी पीढ़ी को मौलिक साहित्य लिखने की प्रेरणा प्रदान की .श्यामसुंदर दास का जन्म सं.१९३२ वि. में अषाढ़ शुक्ल एकादशी को काशी के सुप्रसिद्ध खत्री परिवार में हुआ था . इनके पिता का नाम देविदास और माता का नाम देवकी देवी था . सन १८९०ई. में आपने एल्गोबसा क्यूलर मिडिल परीक्षा पास की . १८९४ ई. में काशी के क्वींस कॉलेज से इंटर परीक्षा उत्तीर्ण की . १८९७ में बी.ए की परीक्षा पास की . सन १८९९ में आप काशी हिन्दू स्कूल में अध्यापक हुए . १९१२ ई . में लखनऊ के कालीचरण हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर काम किया . १९२१ ई. से १९३७ ई.तक आप काशी हिन्दू विश्वविद्लाय में रहे . सन १९२९ में राय बहादुर की उपाधि प्राप्त की . काशी विश्वविद्लाय ने इन्हें डी.लिट की उपाधि देकर सम्मानित किया . सन १९४५ ई .में इनका स्वर्गवास हुआ . 

रचनाएं :-
मौलिक - साहित्यालोचन ,हिंदी भाषा का विकास,रूपक रहस्य,भाषा रहस्य ,हिंदी भाषा और साहित्य .
सम्पादित  - पृथ्वीराज रासो ,रामचरितमानस ,कबीर ग्रंथावली आदि .
संकलित - मानस सूक्तावली .
लेख और निबंध - शिक्षा ,हिंदी का आदिकवि ,नीति आदि .

श्यामसुन्दर दास ने गंभीर विषयों को प्रस्तुत किया है . आपकी भाषा शुद्ध और साहित्यिक होने के साथ साथ ही सरल एवं व्यावहारिक है . यत्र -तत्र अन्य भाषाओँ  - उर्दू आदि के शब्द भी प्राप्त होते है . आपकी शैली विचारात्मक और गवेषणात्मक है . आपकी भाषा संस्कृतनिष्ठ परिष्कृत और खड़ी बोली है .आप आजीवन हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्धि एवं प्रचार - प्रसार में संलग्न रहे . महावीरप्रसाद द्विवेदी का यह वाक्य इस सत्य की पुष्टि करता है - 
मातृभाषा के प्रचारक विमल बी.ए  पास .
सौम्य -शील - निधान बाबू  श्यामसुन्दर दास.

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  1. हिंदी आलोचना पक्ष पर प्रस्‍तुति बहुत की सराहनीय व पठनीय है।
    कृपया इसे और समृद्ध करें जिससे यह पृष्‍ठ और उपयोगी हो।

    दिनेश मणि पाठक

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  2. "बाबू श्यामसुंदर दास हिंदी के पारखी "
    बाबू श्यामसुंदर दास किशोरावस्था में ही हिंदी के प्रति विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न सोच रखते थे |काग्रीप्रचारिणी सभा की स्थापना से ब्लाक स्तर,जिला स्तर,प्रांतीय स्तर पर ही नहीं अपितु विश्व स्तर,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रखरता प्रदान कराया |........शिक्षापयोगी पुस्तकों तथा साहित्यालोचन भी आपकी लिखित संकलित पुस्तक प्रकाशित है जिसका जिक्र रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में किया है |


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