0
Advertisement

राग सारंग
आई छाक बुलाये स्याम।
यह सुनि सखा सभै जुरि आये, सुबल सुदामा अरु श्रीदाम॥
कमलपत्र दौना पलास के सब आगे धरि परसत जात।
ग्वालमंडली मध्यस्यामधन सब मिलि भोजन रुचिकर खात॥
ऐसौ भूखमांझ इह भौजन पठै दियौ करि जसुमति मात।
सूर, स्याम अपनो नहिं जैंवत, ग्वालन कर तें लै लै खात॥

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top