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कबीरा ते नर अन्ध है, गुरु को कहते और ।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर ॥

जागन में सोवन करे, साधन में लौ लाय ।
सूरत डोर लागी रहे, तार टूट नाहिं जाय ॥

साधु ऐसा चहिए ,जैसा सूप सुभाय ।
सार-सार को गहि रहे, थोथ देइ उड़ाय ॥

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  1. सत्य वचन ...
    इस सार्थक प्रस्तुति के लिए आपका आभार.

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  2. satya bachan sukhadae sabhai...........
    esake lia abhar apaka.

    उत्तर देंहटाएं
  3. satya hi ek aisa marg hai jo har hal me har kimat par apni manjil tak pahuchata hai aur ise guru se behtar kou nahi bata sakta. esliye guru ka jiwan jo mahatwa hai wo sansar me kisi aur bastu ka nahi.
    . anjali sharma.

    उत्तर देंहटाएं

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