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प्रिय मित्रों , हिन्दीकुंज में रणजीत कुमार जी के स्तम्भ 'मंगलज्ञानानुभाव' केअंतर्गत आज प्रस्तुत है - स्वतंत्र यह लेख देश की आजादी से सम्बंधित है आशा है कि आप सभी को यह लेख पसंद आएगा इस सन्दर्भ में आप सभी केसुझाओं की प्रतीक्षा रहेगी।


स्वतंत्र

हम आज़ाद हैं पर ये कैसी आज़ादी है. क्या आपने कभी अनुभव किया है की स्वतंत्रता का क्या पर्याय है जीवन में हमारे. क्या आज़ादी का अर्थ महज इतना की जब चाहो आओ जब चाहो जाओ अगर तुम इसमें समर्थ हो तो तुम आज़ाद हो. बाहर की आज़ादी हम देख रहे हैं आज स्वतंत्रता उदंडता में परिवर्तित हो चूका है. ऐसे में कैसे मानू की आज़ाद हूँ मैं. स्वतंत्र के अर्थ पर अगर मंथन करें तो ज्ञात होगा की स्व यानी स्वयं के तंत्र के अधीन स्वाधीन पर क्या हम स्वाधीन है हम तो वस्तुतः अपने मन की जंजीरों से जकड़े हुए हैं. विचारों की श्रृंखला हम पर निरंतर हावी है और मन जिसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं महज विचारों की पोटली है के गुलाम हैं हम. मन के आगे हमारा अस्तित्व घुटने टेके खड़ा है और हम कुंठा, क्रोध, इर्ष्या, द्वेष के मायाजाल में जकड़े आज़ादी का जश्न मना रहे हैं.

अज्ञान का ज्ञान होना भी आवश्यक है और आज़ादी की आंतरिक लड़ाई भी तभी आरम्भ होती है. जिस प्रकार अँधेरा मिटाने के लिए बस एक दीप प्रज्वलित करना होता है कोई युद्ध नहीं उसी प्रकार आंतरिक स्वतंत्रता के लिए ये स्वीकार करना आवश्यक है की हम मन के अधीन है गुलाम हैं उसके. स्वीकार भाव में छिपा है परिवर्तन का संभावित बीज़. किस तरह की आज़ादी वांछित है मन की आज़ादी या मन से आज़ादी. यूँ तो दोनों बहुत ही सामान प्रतीत होते हैं पर निहित भाव अलग है मन की आज़ादी का अर्थ मन जो चाहे करे स्वतंत्र है प्रायः हम यही आज़ादी चाहते हैं, लेकिन मन से आज़ादी का मतलब मन की उदंडता से मुक्ति, मन के अनुचित उड़ानों की पहचान. आज आवश्यकता है की मन से आज़ादी की पहल की जाए ये आज़ादी असंख्य संभावनाओं के द्वार खोलने में सक्षम है.

मन से मुक्त होना वो सुखद अनुभव है जो प्रतिपल संकेत देता है आनंद का, कारण मात्र ये की जब आप मन से आज़ाद होते हैं तो वस्तुतः अतीत और भविष्य में मन के उड़ान पर आपकी नज़र पैनी होती है और आप वर्तमान के पल से पूर्णतः एक होते हैं. वर्तमान से अनुनाद(रेजोनेंस) में बस होने का एहसास है और सच्ची स्वतंत्रता का बोध. आज़ादी का जश्न फिर हम मनाएंगे १५ अगस्त को तो पूछिए स्वयं से की आप की आज़ादी चाहते हैं या से आज़ादी फैसला आपके चिंतन पर निर्भर.

स्वतंत्रोत्सव के पावन पर्व पर आज़ादी के अर्थ के खोज में आपका हमराही मैं सत्यान्वेषी...................



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