किसी को हमने याँ अपना ना पाया - बहादुर शाह ज़फ़र


किसी को हमने याँ अपना ना पाया जिसे पाया उसे बेगाना पाया
कहाँ ढूँढ़ा उसे किस जा ना पाया कोई पर ढूँढ़ने वाला न पाया

उड़ा कर आशियाँ सरसर ने मेरा किया साफ़ इस क़दर तिनका न पाया
उसे पाना नहीं आसॉं, कि हमने न जब तक आपको खोया, न पाया

दवाए-दर्दे-दिल मैं किस से पूछूँ तबीबे-इश्‍क़ को ढूँढा न पाया

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