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हरिशंकर परसाई की व्यंग रचनाएँ डाउनलोड करें
श्री हरिशंकर परसाई जी मुख्यतः व्यंग -लेखक है,पर उनका व्यंग केवल मनोरंजन के लिए नही है। उन्होंने अपने व्यंग के द्वारा बार-बार पाठको का ध्यान व्यक्ति और समाज की उन कमजोरियों और विसंगतियो की ओर आकृष्ट किया है जो हमारे जीवन को दूभर बना रही है। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं शोषण पर करारा व्यंग किया है जो हिन्दी व्यंग -साहित्य में अनूठा है। परसाई जी मूलतः एक व्यंगकार है । सामाजिक विसंगतियो के प्रति गहरा सरोकार रखने वाला ही लेखक सच्चा व्यंगकार हो सकता है। परसाई जी सामायिक समय का रचनात्मक उपयोग करते है। उनका समूचा साहित्य वर्तमान से मुठभेड़ करता हुआ दिखाई देता है। परसाई जी हिन्दी साहित्य में व्यंग विधा को एक नई पहचान दी और उसे एक अलग रूप प्रदान किया ,इसके लिए हिन्दी साहित्य उनका हमेशा ऋणी रहेगा ।यहाँ पर परसाई जी की व्यंग रचनाएँ दी जा रही है। आशा है कि इस पुस्तक के माध्यम से परसाई जी के व्यंग लेखन एवं उनकी लोक दृष्टि को समझने में सहायता मिलेगी ।
आप इस पुस्तक को यहाँ से डाउनलोड करें ,ख़ुद पढ़ें और अपने मित्रों को भी पढने के लिए वितरित करें ।
मुझे आपके सुझावों की प्रतीक्षा है।
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परमजीत बाली
3 नवम्बर 2009 9:39 pm
धन्यवाद।
manish
25 मार्च 2010 5:20 pm
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विजयप्रकाश
8 अप्रैल 2010 7:17 pm
धन्यवाद...बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं आप.
MALAPPURAM SCHOOL NEWS
8 मई 2010 7:43 am
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Gaurav Pandey
29 सितम्बर 2010 3:23 am
I am looking for chikitsa ka chakkar by Parsaai jee. Can anyone help me?
बेनामी
24 अक्तूबर 2011 8:51 pm
kya aapne is file ka link delete kar diya h? ise hum download nahi kar pa rahe hai....plz ise fir se activate kar de....
abhar
Rajnish Jha