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डॉ महेंद्र भटनागर

महेंद्र भटनागर
महेंद्र भटनागर 
डॉ महेंद्र भटनागर भारतीय समाजार्थिक-राष्ट्रीय-राजनीतिक चेतना-सम्पन्न द्वि-भाषिक कवि एवं लेखक हैं। ये सन् 1946 से प्रगतिवादी काव्यान्दोलन से सक्रिय रूप से सम्बद्ध प्रगतिशील हिन्दी कविता के द्वितीय उत्थान के चर्चित हस्ताक्षरों में से एक हैं।
महेंद्रभटनागर की कविताएँ एक ऐसे कवि के रचना-कर्म की फलश्रुति हैं; अपने अब-तक के आयुष्य के छह दशकों तक अपने समय से सीधे आँखें मिलाते हुए जिसने उसके एक-एक तेवर को पहचाना और शब्दों में बाँधा है। इन कविताओं में समय के बहुरूपी तेवर ही नहीं, पूरे समय के पट पर, कभी साफ़-सुथरी; परन्तु ज़्यादातर पेचीदा और गड्डमड्ड लिखी हुई उस इबारत का भी खुलासा है जिसे बड़ी शिद्दत से कवि ने पढ़ा-समझा और उसके पूरे आशयों के साथ हम सबके लिए मुहैया किया है।
छह दशकों की सृजन-यात्रा कम नहीं होती। महेन्द्र भटनागर के कवि-मन की सिफ़त इस बात में है कि लाभ-लोभ, पद-प्रतिष्ठा के सारे प्रलोभनों से अलग, अपनी विश्व-दृष्टि और अपने विचार के प्रति पूरी निष्ठा के साथ, अपनी चादर को बेदाग रखते हुए वे नई सदी की दहलीज़ तक अपने स्वप्न और अपने संकल्पों के साथ आ सके हैं।
हिंदीकुंज.कॉम पर महेंद्र भटनागर जी ,की रचनाएँ बिगत कई बर्षों से प्रकाशित होती रही हैं।  अतः इनकी प्रकाशित रचनाओं की सूची निम्न है - 

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