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झिलमिल झिलमिल करते तारे



झिलमिल झिलमिल करते तारे
हम  सबको   लगते   हैं   प्यारे
टिमटिम- टिमटिम करते सारे
जगमग  करते  नभ  को  तारे।

ओझल होते दिन में तारे
तारे
रात गगन में दिखते तारे
आकाश सजाते हैं सारे
रजनी रोशन करते तारे।

इन तारों की अजब कहानी
नहीं  किसी  ने  है पहचानी
उल्का बन  कर गिरते तारे
टूट  गगन  से  प्यारे  तारे।

नहीं किसी का नाम जानते
न किसी का आकार मानते
कुछ तारों का होता मण्डल
कहलाता   वो   तारामंडल।






- अशोक कुमार ढोरिया

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