0
Advertisement

तुम कौन सी पाटी पढ़े हौ



अति सूधो सनेह को मारग है, जहँ नेकु सयानप बाँक नहीं
घनानंद
घनानंद 
तहँ सीधे चलौ तजि आपनपौ, झिझकैं कपटी जो निशाँक नहीं .
घननंद के प्यारे सुजान सुनौ, यहँ एक ते दूसरो आँक नहीं
तुम कौन सी पाटी पढ़े हौ कहौ, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं .










- घनानंद 

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top