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 मानव


  मानव...!
  रक्तपिपासु मानव...!
  हवस का पुजारी मानव...!
  ईर्ष्या से ओत-प्रोत मानव...!
  आडम्बरयुक्त मानव...!
 मानव

  कबतक ...?
  कबतक इन बातों से मानव जगत,
  शर्मसार होता रहेगा...?
  कबतक मानव, मानव के लिए ख़तरा बनेगा ?
  कबतक हिंसा की अग्नि में मानव भस्म होगा ?
  कबतक...?

 मानव सचमुच बहुत आगे निकल गया है,
 इतना आगे कि,
 अब ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती देने में जुटा है,
 और ऐसा करे भी क्यूँ न,
 आख़िर कायनात के सभी प्राणियों में,
 सर्वश्रेष्ठ और बुद्धिजीवी कहलाने का,
 तमगा जो उसे हासिल है...!

  आज सबसे आगे निकल जाने का ,
  होड़ है मानव में,
  सच कहुँ, तो ईश्वर से भी आगे निकलने की,
  चाहत है मानव में,
  ऐसे में फिर,
  रेंगते कीड़ों से लेकर,
  पक्षी और पशुओं की जात से,
  कैसे पीछे रहते,
  शायद इसलिए आज मानव,
  साँप से ज्यादा जहरीला,
  शेर से ज्यादा खूँखार,
  हाथी से ज्यादा बलवान,
  लोमड़ी से ज्यादा शातिर,
  चीता से ज्यादा तेज,
  और राक्षस से ज्यादा खतरनाक है मानव...!"


                                     
                        


     -मनव्वर अशरफ़ी 
                           जशपुर (छत्तीसगढ़) 
                             7974912639

  

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