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भोले भाले बादल 



झब्बर-झब्बर बालों वाले
गुब्बारे से गालों वाले
लगे दौड़ने आसमान में
बादल
बादल
झूम-झूम कर काले बादल।

कुछ जोकर-से तोंद फुलाए
कुछ हाथी-से सूँड़ उठाए
कुछ ऊँटों-से कूबड़ वाले
कुछ परियों-से पंख लगाए
आपस में टकराते रह-रह
शेरों से मतवाले बादल।

कुछ तो लगते हैं तूफानी
कुछ रह-रह करते शैतानी
कुछ अपने थैलों से चुपके
झर-झर-झर बरसाते पानी
नहीं किसी की सुनते कुछ भी
ढोलक-ढोल बजाते बादल।

रह रहकर छत पर आ जाते
फिर चुपके से ऊपर उड़ जाते
कभी कभी जिद्दी बन करके
बाढ़ नदी नालों में लाते .
फिर भी लगते बहुत भले हैं
मन के भोले - भाले बादल .



- कल्पनाथ सिंह 

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