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हम तो खुद हमारे नहीं है


यूं तो सागर हैं हम,
पर मन से खारे नहीं,
हम तो खुद हमारे नहीं है
कितने रत्न समेटे हैं ,
पर कुछ भी हमारे नहीं।
ये धरती अपनी सी लगती है,
पर इससे मिलने के किनारे नहीं है,
आसमां सर पर छाया है पर,
उससे मिलने के सहारे नहीं है।
पानी ही पानी , पानी ही पानी ,
पर किसी की प्यास के सहारे नहीं है।
कोई हमारा क्या होगा,
हम तो खुद हमारे नहीं है।




-इला श्री जायसवाल
नोएडा

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