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तुमने यह दिल चुराया



जमाना लाख हो दुश्मन चाहे इस मुहब्बत का ,
मोहब्बत करने वाले डरते नहीं है इस ज़माने से .

दिल की बात जुबा पर आती कह नहीं सकते ,
दिल की हसरत दिल में लिए रह नहीं सकते .
मोहब्बत

न ही तुम तड़फों न हमें तड़पाओ ,
दो रूहें मिलने दो एक जान बन जाओ .

देती हो मेरी भूल की इतनी बड़ी सजा ,
ठुकरा के मेरा प्यार न बन जाओ बेवफा .

दिल तोड़ के मेरा न जाओ बिछडके ,
मर जायेंगे हम तेरी यादों में तडपे के .

सावन भी आएगा झूलने नहीं पाओगे ,
जब भी न तुम मिलोगे रो रो के दिल कटेंगे.

सालों गुजर गए उनको जुदा हुए ,
लगता हैं आज ही छुटा है साथ उनका .

झूम रही हैं दरख्तों की टहनियाँ  ,खिल रही हैं फूलों की क्यारियां .
ऐसे मौसम में मदहोश होनी की ,सनम दिल भी कर रहा है तैयारियाँ.

ए खुदा क्या कहूँ इस ज़माने को ,
जो हँसता है मेरी बर्बादी पर .

तुमने यह दिल तो चुराया ,खैर कोई बात नहीं .
शर्मा कर नज़रों का झुकाना ,ले न ले मेरी जान कहीं .


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