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यशपाल के उपन्यास 


यशपाल के उपन्यास  yashpal ke upanyas in hindi यशपाल की उपन्यास कला yashpal ka upanyas kala - यशपाल साम्यवादी उपन्यासकारों में प्रमुख है .इनके प्रमुख उपन्यास दादा कामरेड ,दिव्या ,देश द्रोही ,मनुष्य के रूप ,झूठा सच ,तेरी मेरी उसकी बात  आदि है .यशपाल के उपन्यासों में युग जीवन के संघर्ष का वर्णन है .ये वर्तमान समाज की जर्जर मान्यताओं के खोखलेपन को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत करते हैं .दिव्या इनका ऐतिहासिक उपन्यास है .इसमें बौद्धकालीन संस्कृति को सजीव किया गया है . 

दादा कामरेड -

यशपाल
यशपाल
सन १९४१ में प्रकाशित हुआ था .यह यशपाल का पहला उपन्यास है .हरीश जेल से भागा हुआ एक क्रांतिकारी है .इन लोगों की एक पार्टी है जिसके नेता है - दादा .इस उपन्यास के माध्यम से यशपाल ने अपने राजनितिक व सामाजिक विचारों को व्यक्त किया है .हरीश दादा, शैला ,यशोदा ,अख्तर आदि सभी पात्रों में कुछ न कुछ विशेषताएँ हैं .

देशद्रोही - 

इनका दूसरा उपन्यास देश द्रोही है .गांधीवादी तथा कांग्रेस की आलोचना तथा रुसी समाजवाद का प्रतिवादन इस उपन्यास का उद्देश्य रहा है .इसका कथानक फौजी अस्पताल के डॉक्टर भगवान् दास खन्ना का है .एक रात छापा मारकर मरीज लोग डॉक्टर खन्ना को भी उठा ले जाते हैं .ईद के दिन डॉक्टर को नमाज़ पढ़ाकर मुसलमान बना लिया जाता है .अब उसे गजनी लाया जाता है और उसका प्रबंध एक व्यापारी के यहाँ कर दिया जाता है .परिस्थितियों में परिवर्तन आता है और डॉक्टर खन्ना कम्युनिस्ट पार्टी का काम करने लगते हैं .देशद्रोही की योजना बड़ी श्रम साध्य है .घटनाओं ,परिस्थितियों तथा पात्रों का नियंत्रण लेखक के द्वारा किया हाता है . 

दिव्या - 

दिव्या एक ऐतिहासिक उपन्यास है .इसकी नायिका दिव्या भद्र सम्ज्राज्य के धर्मस्थ महापंडित देव शर्मा की प्रपौत्री हैं .मधुपर्व पर उसे सरस्वती पुत्री की उपाधि मिलती हैं .अंत में दिव्या बौद्ध धर्म स्वीकार करती है . 

मनुष्य के रूप - 

सामाजिक विषमता से उत्पन्न मानव जीवन की व्याख्या की गयी है .इसमें मनुष्य निर्मित संस्थाओं के प्रति लेखक का दृष्टिकोण व्यंगात्मक है . 


अमिता - 

यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है .इसमें अशोक के कलिंग पर आक्रमण तथा उसकी एक ह्रदय विदारक घटना का वर्णन है .

झूठा सच - 

झूठा सच यशपाल जी का प्रसिद्ध उपन्यास है .उपन्यासकार ने इसमें सन १९४७ से १९५७ तक देश का राजनितिक वातावरण प्रस्तुत किया है . देश के विभाजन को लेकर लाहोर में जो साम्प्रदायिक झगड़े हुए थे ,उसका इसमें चित्रण किया गया है .राजनितिक ,सामाजिक ,धार्मिक वातावरण के बीच मानव संबंधों की इसमें चर्चा की गयी है . 

तेरी मेरी उसकी बात - 

इस उपन्यास में एक ईसाई युवती का ममत्व  भाव चित्रित है .इसमें भी राजनैतिक और सामाजिक क्रांति की चर्चा करके नैतिकता की विजय दर्शायी गयी है .उपन्यास की नायिका उषा नैतिकता को मोड़ने में अंततः समर्थ सिद्ध होती है . 

इनके अन्य उपन्यास मनुष्य के रूप ,बारह घंटे आदि है .इनके सभी उपन्यासों में बुद्धि की प्रधानता रहती है . 

यशपाल हिंदी उपन्यास जगत के एक क्रांतिकारी उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध है .इनके अधिकाँश उपन्यास साम्यवादी विचारों के समर्थक हैं .अतः इनके उपन्यासों के दलित शोषित और पीड़ित वर्ग के लिए अपार सहानुभूति है . 


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