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तीन दृश्य शहीदों की चिताओं के


1
आज सबेरे
सूरज रोया
झर झर आंसू
उसके बहते
शहीद
शहीद
छह माह के बालक ने
दी मुखाग्नि
अपने शहीद पिता को।

2
शहीदों की चिताओं से
निकलती ज्वाला में
देश के सामने घने
आशंकाओं के बादल गहरे।
वोटों की आस में
चमकते नेताओं के चेहरे।

3
फुलवामा से एक चिट्ठी
काश माँ
मैं लड़ कर शहीद होता।
पीठ पर वार किया
सीने को तो छुआ होता।
मेरी चिता पर
मत बहाना तुम आंसू
हँसते मुस्कुराते
तेरा बेटा विदा होता।


- सुशील शर्मा

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