0
Advertisement

ज्वालामुखी में पल रहे हैं



दुखी है ,ग़मगीन है और आँसू में भीग रहे हैं ,
तुम्हें देखके यूँ ताबूत में ,खून बनके खौल रहे हैं ,
उखाड़ के जमीं को आसमां ,आसमां को तोड़ के जमीं कर दूँ,
एहसास ऐसे बारूद से ,ज्वालामुखी में पल रहे हैं .








- पुष्पलता शर्मा 'पुष्पी'

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top