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कबूतर


सुंदर  पक्षी  कबूतर हूँ .
शांति दूत कहलाता हूँ  ..
कबूतर
कबूतर

क्रांति मुझे सुहाती नहीं.
अमन जग में चाहता हूँ।

प्रेमियों  का चहेता हूँ  .
प्रेम -पत्र  पहुँचाता हूँ..

डाकपाल कहलाता हूँ.
गुटरगूँ  मैं  करता  हूँ ।

दाना चुग्गा  खाता हूँ.
संग कबूतरी खेलता हूँ।

सादा जीवन जीता हूँ.
सबका प्यारा होता हूँ।



-अशोक कुमार ढोरिया

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