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इंकलाब ज़िंदाबाद


इंकलाब ज़िंदाबाद आज सड़क पर रैली देखी ,कुछ लोग हाथों में मोमबत्तियाँ जलाए हुए, जोर-जोर से नारे लग रहे थे ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ , ‘भारत माता की जय’ , ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ आदि आदि | ये सब पुलबामा में शहीद हुए सैनिकों की शहादत का बदला माँग रहे थे | ऐसा ही दृश्य इस समय देश के हर गाँव, हर शहर, हर
रैली
गली-मोहल्ले में दिख रहा है | सही भी है,इतना भी सहिष्णु क्यों बनना कि आपकी सहिष्णुता को लोग आपकी कमजोरी समझने लग जाएँ | वैसे भी अति हर चीज की बुरी होती है | भले ही हम आज अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हो चुके हैं | पर ये आतंकवाद फिर से हमारे पैरों में बेड़ियाँ डालना चाहता है |

पर ये जन आक्रोश उन आतंकवादियों के लिए एक संदेश है सैनिक सिर्फ वर्दी वाले ही नहीं होते बल्कि जनमानस भी होते हैं जो देश के अंदर रहते हुए हर जगह देशप्रेम की मशाल को जलाए रखते हैं |

 प्रेम के त्योहार पर अपनी जान से बड़ा तोहफा और क्या होगा अपने देश के लिए |  आज हर मन दुखी है उन शहीदों के लिए,उनके परिवारों के लिए | पर उससे भी बड़ा अफ़सोस यह है कि सैनिकों को लड़ने का मौका तो दिया होता | एक सैनिक जब फ़ौज में जाता है तो उसके मन में यह ख्याल सबसे पहले आता है कि वह दुश्मन को मार गिराएगा | अपनी जवानी को देश पर कुर्बान कर देगा | परिवार वाले भी ऐसे ही सोचते हैं | हमारा बेटा हमने देश के नाम कर दिया | पर उसको यह मौका नहीं मिला | लड़ने का इतना ही शौक है तो सामने से आओ , हम तैयार हैं, हम मरने-मारने का जज्बा रखते हैं | पर कायर नहीं है जो इस तरह से वार करें | ऐसा करके उन्होंने सैनिकों का ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों को तैयार कर दिया हर स्थिति के लिए | हमारी उदारता का काँच तोड़कर उन्होंने हमारे इरादों को नुकीला और धारदार बना दिया है | जो आक्रोश सिर्फ चिंगारी था वह अब धधकती प्रचंड ज्वाला का रूप ले चुका है | आज हर कोई तैयार है लड़ने के लिए , लड़ाई के लिए | 

प्रेम उन्हीं से करो जो तुम्हारे प्रेम की कद्र करें | क्या ज़रूरत है पाकिस्तान से किसी भी तरह का कोई भी संबंध रखने की | कोई फिल्मों में काम दे रहा है , कोई रियलिटी शो में बुला रहा है ,कभी मैच हो रहा है , कोई शादी कर रहा है , बसें चलाई जा रही है ,सामान का आयात-निर्यात हो रहा है आदि-आदि | ये सूची बहुत लंबी है...आखिर क्यों किया जाता है ? क्या अगर पाकिस्तान से व्यापार नहीं होगा तो हमारा काम नहीं चलेगा , फिल्में नहीं बनेंगी ,कोई गायक नहीं मिलेगा , सामान कहीं और नहीं मिलेगा ,हमारे खिलाड़ियों के पास कोई और प्रतिद्वंदी टीम नहीं है क्या ......| लगता है जैसे सबकी अक्ल पे पत्थर पड़ गए हों ..कोई खेल के नाम पर,कोई कला के नाम पर,कोई व्यापार के नाम पर.कोई धर्म के नाम पर,कोई दिल के नाम पर वहाँ से रिश्ता रखने को बेताब है | यह नहीं सोचते जब देश नहीं रहेगा तो हम रहेंगे क्या ? पाकिस्तानी व्यापार करते हैं ,मैच खेलते हैं ,कलाकार आते-जाते हैं , प्रेम या शादी इसलिए करते हैं क्योंकि आप भारतीय हैं | वरना पूरी दुनिया हर चीज़ मिलती है | और कुछ भारतीयों की दिलदारी पूरे देश के लोगों को भुगतनी पड़ती है | फिर वही लोग सबसे आगे आकर कभी सरकार को तो कभी सेना को निशाना बनाते हैं | 

कश्मीर में इतनी समस्याएं हैं तो कुछ समय के लिए बंद करदो वहाँ आना-जाना | इसी तरह कुछ समय के लिए कश्मीरियों के भी कहीं आने-जाने की रोक लगनी चाहिए | अब ऐसा करने पर सब अपने मौलिक अधिकारों की दुहाई देने लगेंगे | चाणक्य ने कहा है कि देश सर्वोपरि है | हमारी स्वतंत्रता देश की रक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए | 

ये रैलियां देखकर आज़ादी के आंदोलन की याद आ जाती है | आज उसी आंदोलन की लहर की जरुरत है | ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ , ‘असहयोग आंदोलन’ , ‘तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ , ‘आज़ादी मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ , ‘इंकलाब जिंदाबाद’ आदि-आदि | ऐसे नारे जिन्हें सुनकर भारतीयों के मन में देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ता था | और हर भारतीय की आत्मा तड़प उठती थी अपने देश को आज़ाद कराने की | आज वही तड़प चाहिए अपने देश को आज़ाद कराना है इस आतंक से , इन आतंकवादियों से | तभी तो हम अमन-चैन से अपना जीवन जी पाएंगे |        

        
- इलाश्री जायसवाल

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