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साइबर क्राइम क्या है और साइबर अपराध के प्रकार 
Cyber Crime in Hindi & what is cybercrime in hindi


साइबर क्राइम क्या है और साइबर अपराध के प्रकार साईबर अपराध साइबर अपराध से बचाव के उपाय साइबर कानून क्या है? What is Cyber laws? साइबर क्राइम पर निबंध साइबर अपराध मुख्यतः इन्टरनेट से जुड़े कम्प्यूटरों पर किए जाते हैं। जो कम्प्यूटर इंटरनेट से जुड़ जाता है। उस पर इन्टरनेट से जुड़े अन्य कम्प्यूटरों में डाली गई।सूचनाओं व तथ्यों को देखा जा सकता है। यदि कुछ कोड जो हमारी किसी विशेष वैबसाईट की अन्तरंग सूचना तक पहुँचने में हमारी सहायता कर सकते हैं, हमें मिल जायें तो हम उस वैबसाईट की सूचनाओं से छेड़छाड़ कर सकते हैं। ये कोड अथवा पासवर्ड प्राप्त करने इतने कठिन नहीं हैं। मनचले नौजवान, कम्प्यूटर
साइबर अपराध
साइबर अपराध
प्रोग्रामर और धन के लालची कम्प्यूटर उपभोक्ता वैबसाईटों की सूचनाओं को तोड़ने-मरोड़ने के लिए इन कोडों को प्राप्त कर लेते हैं।इन गलत गतिविधियों के लिए सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। एक बार किसी वैबसाईट पासवर्ड या कोड प्राप्त करने के बाद लोग उस वैबसाईट पर छेड़छाड़ करके धन व सूचना का आदान-प्रदान कर लेते हैं।इसको तकनीकी भाषा में साईबर अपराध कहा जाता है।

साइबर अपराध के प्रकार -

इस प्रकार के अपराध कई किस्मों के हो सकते हैं। सर्वप्रथम, कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को ई-मेल सेवा द्वारा भद्दे अथवा कलुषित सन्देश भेज सकता है। इस कार्य से ई-मेल प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मन को ठेस लगती है। द्वितीय, कोई व्यक्ति जिसको कम्प्यूटरों की थोड़ी-बहुत जानकारी हो, कम्प्यूटर वायरस इन्टरनैट पर कला सकता है। आमतौर पर ई-मेल सेवाओं को यह दुष्कर्म करने के लिए प्रयुक्त या जाता है। जिस भी कम्प्यूटर में ये ई-मेल सन्देश जाते हैं उसमें वायरस प्रवेश पाकर कम्प्यूटर को बरबाद कर देते हैं। मशीन व उसकी सूचना दोनों ही बुरी तरह से ध्वस्त हो सकते हैं। हॉल ही में फिलीपीन्स की पुलिस ने ‘आई लव यू' वायरस के जनक को गिरफ्तार किया था।तृतीय, गलत इरादों वाले व्यक्ति बैंक के खातों को संख्याओं की पहुंच कोडों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। वे इन बैंकों से पैसा अपने खातों में स्थानान्तरित करवा लेते हैं और बैंकों को पता भी नहीं चलता। आवश्यकता होती है थोड़ी चतुराई की और इन अपराधियों के वारे-न्यारे हो जाते हैं। 

कुछ व्यक्ति निजी क्षेत्र के उपक्रमों के वेबसाईटों पर जाकर उत्पात मचा देते हैं। वे उन वैबसाईटों पर वायरस भेज देते हैं, वहां से अति संवेदनशील सूचना प्राप्त कर लेते हैं अथवा दुष्प्रचार के हथकंडे अपनाकर किसी वैबसईट पर किसी व्यक्ति अथवा उपक्रम की छवि बिगाड़ने का भरसक प्रयास करते हैं।

साइबर क्राइम से कैसे बचें -

साईबर अपराधों को रोकना आवश्यक हो गया है क्योंकि आने वाले समयों में सभी कार्यकलाप इन्टरनेट के द्वारा ही होंगे। कुछेक सिरफिरे अपराधी या युवक तथा युवतियां इन्टरनैट को खिलौना बनाकर अपने घटिया लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु दिन-रात कम्प्यूटर पर सर्किंग करते हैं। उनको सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि साईबर अपराधियों से निपटने के लिए आई0 टी0 एक्ट (2000) पारित किया जा चुका है। इसके अन्तर्गत साईबर अपराधियों को कठोर दण्ड देने का प्रावधान है। अमेरिका में भी जहां साईबर अपराध अधिक संख्या में होते हैं, इस प्रकार के कठोर कानून बनाये जा चुके हैं। 

साईबर अपराध मानव जाति पर एक बदनुमा दाग की भांति है। इनके चलते मानव सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्नति नहीं कर पायेगा। आने वाले समय में कम्प्यूटरों इन्टरनेट तथा इलैक्ट्रॉनिक तकनीकों का बोलबाला रहेगा। साईबर अपराध इन तीनों क्षेत्रों को सफलतापूर्वक अपना निशाना बना लेंगे। सरकारों, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े लोगों तथा निजी क्षेत्र के उपक्रमों पर इन अपराधों को रोकने की जिम्मेदारी है। 

साइबर कानून क्या है? What is Cyber laws? 

साईबर कानून ,विधि की वह शाखा है जो साइबर अपराधों पर रोक लगाती है। और सूचना प्रौद्योगिकी को विनियमित करती है। इसी सन्दर्भ में भारत के राष्ट्रपति ने देश का पहला साईबर कानून ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000' को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस अधिनियम का उद्देश्य है इलेक्ट्रॉनिकल डाटा इंटरचेंज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार साधनों के द्वारा किए गए लेन-देन जिसे सामान्यतया ई-कॉमर्स कहा जाता है, को कानूनी मान्यता प्रदान करना। इसके अन्य उद्देश्यों में कुछ अन्य हैं-कागज आधारित संचार व सूचना संग्रहण के विकल्पों का उपयोग करना, सरकारी संस्थाओं में दस्तावेज की इलेक्ट्रॉनिक्स फाईलिंग को सुविधाजनक बना तथा भारतीय दंड संहित, इंडियन एविडेंस एक्ट, (1872), बैंकर्स बुक एविडेंस एक्ट (1891) तथा आर०बी०आई० एक्ट (1984) में संशोधन करना। इस अधिनियम का उद्देश्य एक ऐसा कानूनी ढांचा महैय्या कराना है जिससे कि इलेक्ट्रॉनिक प्रौसेसिंग साधनों के द्वारा होने वाला गतिविधियों के सन्दर्भ में कानून की पवित्रता बरकरार रहे। इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ई-मेल अब संचार का एक वैध रूप माना जाएगा और इसे न्यायालय में भी मान्यता दी जाएगी। अधिनियम द्वारा प्रदान किए गए कानूनी ढांचे के आधार कम्पनियां अब ई-कॉमर्स को जारी रख सकती हैं।आशा की जा सकती है कि साईवर अपराधों को रोकने में यह कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 


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