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 भूख

             

  भूख क्यों लगती है आदमी को भी
                 या भूख ही क्यों लगती है आदमी को
                   बहुत सारी अपनी परायी
                    आकांक्षायें-इच्छायें
                    और एहसास खाकर भी
  भूख
  भूख
                 बराबर पीड़ित प्रताड़ित करती रहती
                   उफनती रहती है हरदम
                 
                        आदमी कोल्हू के बैल सा
                    बहुत सी अच्छाइयों-सच्चाइयों से
                         आंखें मूंदता
                      चाही-अनचाही बुराइयों में सनता

पट्टी बांधे आंखों पर
बिलकुल कोल्हू के बैल सा
घूमता रहता है
इस कायाकल्प मायायुक्त कोठरी में
जीवन के खूंटे से बंधा
चलता रहता है चलता रहता है
पर भूख तब भी नहीं मिटती
                भूख को नहीं खत्म कर पाता आदमी
                 पर एक दिन भूख
                 खा लेती है आदमी को
              विलीन होने के बाद भी
              आत्मा भूखी रहती है
             हाय! क्या यही नियती है
              भूख!
         क्यों लगती है आदमी को भी
        या भूख ही क्यों लगती है आदमी को  





संध्या रियाज़ - प्रसिद्ध फिल्म निर्देषक मुजफफ्र अली की फिल्मों,धारावाहिकों और टेलीफिल्मों में लेखन और निर्देषन के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी।सहारा वन चैनल में एक्सक्यूटिव प्रोड्यूसर और कलर्स,सहारा वन इमेजिन आदि में प्रसारित अनेकों धारावाहिकों की क्रियेटिव हेड रहीं.सम्प्रति :-मुम्बई में क्रियेटिव आई लिमिटेड के फिल्म एवं टेलीविजन विभाग में आइडियेषन हेड के पद पर कार्यरत। 

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