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बसंत पंचमी


बसंत पंचमी का त्योहार एक महोत्सव है |बसंत पंचमी (Basant Panchami) 10 फरवरी को मनाई जा रही है. यह बसंत ऋतु की प्रधानता को ग्रहण कर प्रवर्त हुआ है | बसंत ऋतु का दूसरा नाम ऋतुराज है , क्योंकि यह ग्रीष्म ,
श्री सरस्वती देवी
श्री सरस्वती देवी
वर्षा , शरद , शिशिर , हेमंत इन सब ऋतुओं में प्रधान है | अत: यह ऋतुराज कहलाता है क्योंकि इसमें न शीत है , न उष्णता है और न वर्षा ही है | यह आनंद कहलाता है | बसंत के जन्म में हेमंत का वार्द्धक्य है | हेमंत के अंत में और बसंत के बाल्यकाल में पतझड़ हो जाता है तथा इसके युवाकाल में वृक्षों पर नए पत्ते ,पुष्प आदि विकसित होने लगते है एवं प्रफुल्लित पुष्पों पर भ्रमर, मधुर-मधुर गुंजारने लगते हैं | भगवान श्री कृष्णचंद्र ने भी श्री भगवद गीता में “ऋतुनां कुसुमाकर:” कहा है | अर्थात ऋतुओं में बसंत ऋतु मेरी विभूति है | प्रकृति देवी भी स्वागत के लिए प्रस्तुत हो जाती है | जिससे समस्त वनस्पति वर्ग, पल्लवित और पुष्पित हो जाता है | किसी कवि ने कहा है कि –

ऋतु बसंत याचक भये , वृक्षन दीन्हें पात |
ताते नव पल्लव मिले,दियो वृथा नहिं जात ||

संसार में जो दान करता है,उसका वह दान व्यर्थ नहीं जाता है,कभी न कभी अवश्य फलीभूत हो जाता है | जिस प्रकार बसंत ऋतु के जन्म से ही वृक्षों ने पत्तों का दान कर दिया ,फिर कुछ काल के पश्चात् वृक्षों में नए पत्ते आ गए | 

बसंत पंचमी में ही भगवती श्री सरस्वती देवी का प्रादुर्भाव हुआ है | अत: यह श्री पंचमी भी कहलाती है  | यहाँ “श्री” शब्द का अर्थ श्री सरस्वती देवी है | अर्थात यह पंचमी , बसंत ऋतु तथा भगवती श्री सरस्वती देवी की जन्मतिथि है | 

एक समय भगवान श्री कृष्णचंद ने विद्या की अधिष्ठात्री भगवती श्री सरस्वती देवी को अत्यंत प्रसन्न होकर यह वर दिया – “ हे देवि ! हमारे वरदान से कल्प-कल्प में चौदह मनु, इन्द्रादिक देवता , मुनिराज मोक्ष चाहने वाले संत ,योगी ,सिद्ध ,नाग ,गंधर्व ,किन्नर और मनुष्य ये सभी – विधिपूर्वक तुम्हारी पूजा करेंगे तथा प्रतिवर्ष माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी में एवं विद्या के आरंभ काल में तुम्हारी विशेष पूजा हुआ करेगी |”

इस वरदान के अनंतर उसी समय से माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी में वाणी और विद्या की अधीश्वरी भगवती श्री सरस्वती देवी की विशेष पूजा होती है | भगवती श्री सरस्वती देवी आराधना से प्रसन्न होकर अपने भक्तों के मनोरथों को पूर्ण करती हैं |    


-इलाश्री जायसवाल 

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