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शब्द सत्ता



नदी के कल्पित किनारे से,
शब्द ढूंढ़ते भाव।
शब्द
काल में प्रवाह में ,
शब्द की निहित सत्ता,
आत्म-बिम्ब उकेरती।

मौन द्वारा सम्प्रेषित,
दमित स्मृतियों की सत्ता।
समूची सभ्यताओं, संस्कृतियों के ढाँचे।
स्मृति के विस्तार में होते प्रतिबिम्बित।

गतिशील सर्जना,
सम्पृक्ति की संवेदना से विलग।
शब्दहीन अन्तराल में,
निहित हमारी अनुभूति।
खोजती भाषा के रूप और धर्म
साथ में समेटे ,
शब्द के स्वयम्भूत अर्थ।



- सुशील शर्मा

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