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रक्षक या भक्षक


अचानक एक खेत से मैं मैं मैं मैं की आवाज़ आई। मैंने और मेरे दोस्त भानू  ने वहाँ जाकर देखा तो दो -तीन कुत्तों ने एक बकरी के बच्चे को घेर रखा था। कुत्तों ने बकरी के बच्चे को लहू लुहान कर रखा था ।जब तक हम उस
बकरी का बच्चा
बकरी का बच्चा
बकरी के बच्चे को छुड़ाने पहुँचे तब तक बेचारा बकरी का बच्चा मरा तो नहीं था लेकिन अचेत अवस्था में हो गया था। हमने कुत्तों को वहाँ से भगाया। कुछ देर बाद बच्चा होश में आ गया था। बकरी के बच्चे की हालत देखकर हम इतने दुःखी हुए कि हमारी आँखों से आँसू रोकने से भी नहीं रुक रहे थे।हमने बच्चे को सहलाते हुए कहा-"दुष्टों ने बेचारे की क्या हालत कर दी है। "

चन्द पल बाद ही देखा एक व्यक्ति हमारी तरफ भागा आ रहा था।हमने उस व्यक्ति से पूछा-"क्या बात है ? आप इतनी तेजी से क्यों भाग रहे हो, आप कौन हो ?"

उस व्यक्ति ने बताया-"मैं एक कसाई हूँ, मीट की दुकान कर रखी है। अभी -अभी  मेरी दुकान पर दो ग्राहक आए थे और पाँच किलो बकरे के मीट का ऑर्डर देकर गए थे। लेकिन जब मैं बकरी के बच्चे को काटने की तैयारी कर रहा था यह अचानक छुड़ाकर भाग गया।

बकरी का बच्चा हमारी तरफ तरस भरी आँखों से देख रहा था कि ये मेरे रक्षक हैं या भक्षक ।

क्योंकि कसाई को मीट का ऑर्डर हम ही देकर आए थे।



-अशोक कुमार ढोरिया

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