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पराली में छुपा प्रदूषण


एक दिन एक दस वर्षीय लड़का भोलू अपने कमरे में बैठा विज्ञान की पुस्तक पढ़ रहा था।पुस्तक  में लिखा था कि
पराली
पराली
नीम  की  पत्तियाँ जलाकर  धुँआ  करने से मच्छर कमरे से बाहर निकल  जाते  हैं।मच्छर  उसे   काफी देर  से परेशान  कर भी  रहे  थे।उसने सोचा  क्यों  न इसका प्रयोग करके देखा जाए।
                        
वह बाहर से कुछ नीम के पत्ते लाकर कमरे में जला देता है। कमरे में धुँआ ही धुँआ हो जाता है। इतनी  ही देर में उसके पिता जी घर आ जाते हैं। उसके पिता जी ने उसे डाट फटकार लगाते हुए कहा- "वेवकूफ  कहीं के, ये क्या कर  रखा है घर में ?  सारे घर  में धुँआ  ही धुँआ  कर रखा है ; कितनी  परेशानी  हो  रही  है हमें ।"

भोलू सहज स्वभाव में पिता जी  से कहता  है -पिता जी, आपको  इतना -सा धुँआ करने से इतनी परेशानी हो रही है तो कल  आप दस एकड़ में फसल अवशेष(पराली) जला कर आए थे  तब किसी  को परेशानी नहीं हुई होगी?
              
बेटे की बात सुनकर वे इतने शर्मा गए जैसे उसे साँप सूंघ गया हो। तभी उसने खेत में कभी भी फसल अवशेष (पराली) न जलाने  की कसम खाई।




- अशोक कुमार ढोरिया

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