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नेताओं से आजादी बाकी है मेरे भाई



नेताजी कह रहे हैं-
तू हिन्दू, तू मुस्लिम, तू सिख, तू ईसाई
तो बताओ, तुम कैसे हुए भाई-भाई।
भाईचारे के नाम पर
नेताजी
नेताजी
भाई-भाई को आपस में लड़वाई
अपनों को ही अपने से बैर करवाई
अमन के नाम पर विष फैलाई।
नेताओं का नहीं है
कोई धर्म ईमान मेरे भाई।
अब तो साधुबाबा ने भी
बजरंगी को दलित बतलाई।
कभी भाषा, तो कभी जाति के नाम पर
लोगों को खूब उकसाई
एक-दूसरे को आपस में भिड़वाई।
आज नेता अपने व्यंग्यबाण से
नित-नई विष फैला रहा है
नित्य-नई अड़ंगे डलवा 
अपना काम निकाल रहा है
जनता को लाॅलीपाॅप झांसे में
नित नई भ्रम फैला रहा है
आज नेता बातें विकास की करता
और काम विनाश की कर रहा है
अपना उल्लू साध रहा है
जनता को आपस में लड़वा रहा है
भाई जवानों के बलिदानों से
सीमा और देश सुरक्षित है।
नेता नामक दीमक देश को लूट रहा है
आज नेता सुविधा के नाम पर
अपने ही देश को लूट रहा है
यह बड़ी कड़वी सच्चाई है
देश फण्ड से बड़ा पार्टी का फण्ड हो गया है
आज देश, नेताओं से आजादी की मांग रहा है भाई
नेताओं से छुटकारा पाना है तो
बिगुल बजाओ सब मिल भाई-भाई
नेताओं की वैसी-तैसी करो मेरे भाई
अंग्रेजों से हमने आजादी पाई
लेकिन नेताओं से आजादी बाकी है मेरे भाई।



- बरुण कुमार सिंह

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  1. करतब दासा देस जो लूट खूँद कर खाए |

    कहौ बंधू साँचहि कहा कहन जोग सो भाए ||
    भावार्थ : - इस देश को दास बनाकर जिन्होंने इसका आर्थिक शोषण किया बंधू सत्य कहिए क्या वह भाई कहलाने के योग्य हैं ?

    उत्तर देंहटाएं
  2. नेताओं से आजादी बाकी है मेरे भाई |
    सत्य कहते हो आप मेरे लेखक भाई ||

    लेखक बन, नौ कक्षा पढ़े तेजस्वी को नेता बनाई |
    दलित के कंधों बिठा मीडिया मायावती जी लाई ||

    मीडिया के संग मिल कांग्रेस थी सत्ता में जो आई |
    भ्रष्टाचार और अराजकता की जननी के गुण गाई ||

    जब कहा साधुबाबा ने बजरंगी को दलित बतलाई |
    नहीं पूछा क्यों, सब हिन्दुओं को मिल वापिस लाई ||

    कहते, नेताओं का नहीं है कोई धर्म ईमान मेरे भाई |
    क्यों उनके संग मिल साधुबाबा की मुरली बजाई ? ||

    उत्तर देंहटाएं

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